Home चंडीगढ़ मजदूर दिवस पर बुलाया विधानसभा का विशेष सत्र पूरी तरह राजनीतिक एजेंडे से प्रेरित : सुखपाल खैहरा

मजदूर दिवस पर बुलाया विधानसभा का विशेष सत्र पूरी तरह राजनीतिक एजेंडे से प्रेरित : सुखपाल खैहरा

by Doaba News Line

दोआबा न्यूज़लाइन

कांग्रेस विधायक बोले- सरकार बचाने और अविश्वास प्रस्ताव टालने की तैयारी में ‘आप’

चंडीगढ़ : पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं भुलत्थ से विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने 1 मई मजदूर दिवस पर बुलाए गए पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह विशेष सत्र जनहित, मजदूर हित या नीति निर्माण के लिए नहीं, बल्कि पूरी तरह राजनीतिक गणित साधने और अपनी सत्ता सुरक्षित करने के उद्देश्य से बुलाया गया प्रतीत होता है।

सुखपाल खैहरा ने अपने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी बयान में आशंका जताई कि मुख्यमंत्री भगवंत मान इस विशेष सत्र के माध्यम से विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि सरकार के खिलाफ अगले छह महीनों तक किसी भी संभावित अविश्वास प्रस्ताव की गुंजाइश को समाप्त किया जा सके।

उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी को इस समय अपनी सरकार की स्थिरता को लेकर अंदरूनी स्तर पर बड़ा खतरा महसूस हो रहा है। यही कारण है कि मजदूर दिवस जैसे प्रतीकात्मक दिन का उपयोग राजनीतिक कवच तैयार करने के लिए किया जा रहा है। खैहरा ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में मजदूरों, कर्मचारियों और आम जनता के मुद्दों को लेकर गंभीर होती, तो वह बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की बदहाली, कर्मचारियों के बकाया और कानून-व्यवस्था जैसे ज्वलंत विषयों पर ठोस फैसले लेकर आती।

कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि प्रदेश की जनता को भावनात्मक संदेश देने के लिए मजदूर दिवस की आड़ ली जा रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि सरकार अपनी संख्याबल की मजबूती का सार्वजनिक प्रदर्शन कर विपक्षी दलों को राजनीतिक संदेश देना चाहती है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का उपयोग जनहित के बजाय सत्ता प्रबंधन के लिए किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

खैहरा ने कहा कि पंजाब में इस समय शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, उद्योग, नशा और वित्तीय संकट जैसे अनेक गंभीर मुद्दे सरकार के सामने खड़े हैं, लेकिन सरकार जनता के प्रश्नों का उत्तर देने के बजाय राजनीतिक ड्रामेबाजी में व्यस्त दिखाई दे रही है। मजदूर दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर श्रमिकों के अधिकारों, न्यूनतम मजदूरी, संविदा कर्मचारियों की समस्याओं और सामाजिक सुरक्षा पर चर्चा होनी चाहिए थी, न कि राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन पर।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विशेष सत्र में केवल विश्वास प्रस्ताव या सत्ता बचाने से जुड़े कदम उठाए गए तो पंजाब की जनता इसे अच्छी तरह समझेगी और आने वाले समय में इसका राजनीतिक जवाब भी देगी।

राजनीतिक हलकों में खैहरा के इस बयान को आम आदमी पार्टी सरकार पर विपक्ष के बढ़ते दबाव के रूप में देखा जा रहा है। मजदूर दिवस पर प्रस्तावित यह विशेष सत्र अब केवल विधायी कार्यवाही नहीं, बल्कि पंजाब की राजनीति में शक्ति परीक्षण का मंच बनता दिखाई दे रहा है।

 

 

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