दोआबा न्यूज़लाइन
कहा-लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ काम करने वालों के खिलाफ हो कार्रवाई
चंडीगढ़/जालंधर : पंजाब की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज होने जा रही है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने घोषणा की है कि वह आगामी 5 मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर राज्य के सात बागी सांसदों से जुड़े कथित दलबदल प्रकरण को प्रमुखता से उठाएंगे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जनादेश के साथ विश्वासघात करने और राजनीतिक स्वार्थ के लिए पार्टी लाइन से हटकर गतिविधियां चलाने वाले जनप्रतिनिधियों के खिलाफ संवैधानिक स्तर पर कार्रवाई की मांग की जाएगी।
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि यह मामला केवल किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा और जनता के भरोसे का है। जिन विधायकों को जनता ने एक विचारधारा और पार्टी के नाम पर चुनकर विधानसभा भेजा, यदि वही निजी हितों के चलते जनभावनाओं से खिलवाड़ करते हैं तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के समक्ष वह यह मुद्दा विस्तार से रखेंगे कि किस प्रकार पिछले कुछ समय से सात विधायक पार्टी अनुशासन से बाहर जाकर ऐसी गतिविधियों में शामिल रहे हैं, जिनसे सरकार की नीतियों, संगठनात्मक मजबूती और जनता के बीच गलत संदेश गया है। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि इस पूरे प्रकरण में दलबदल कानून के तहत कार्रवाई की मांग भी की जाएगी।
मान ने कहा कि पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार को राज्य के 94 विधायकों का स्पष्ट समर्थन प्राप्त है और सरकार पूरी मजबूती के साथ काम कर रही है। कुछ व्यक्तियों की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से सरकार की स्थिरता या जनहित के कार्यों पर कोई असर नहीं पड़ने वाला। उन्होंने कहा कि जनता ने बदलाव, पारदर्शिता और ईमानदार शासन के लिए वोट दिया है, इसलिए सरकार अपने वादों से पीछे नहीं हटेगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पार्टी विरोधी गतिविधियों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चाहे वह कोई बड़ा चेहरा हो या छोटा कार्यकर्ता, संगठन और जनादेश से ऊपर कोई नहीं है। जो लोग राजनीतिक लाभ के लिए दल बदलने या पर्दे के पीछे सौदेबाजी की राजनीति कर रहे हैं, उन्हें जनता के सामने जवाब देना होगा।
राजनीतिक गलियारों में मुख्यमंत्री मान के इस बयान को आगामी दिनों में पंजाब की राजनीति में बड़े घटनाक्रम की शुरुआत माना जा रहा है। राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद यदि इस मामले में औपचारिक शिकायत दर्ज होती है तो सात सांसदों की सदस्यता और उनकी राजनीतिक स्थिति पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ समय से पंजाब की सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर असंतोष, अनुशासनहीनता और संपर्कहीन विधायकों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री का स्वयं राष्ट्रपति से मिलकर यह मुद्दा उठाना स्पष्ट संकेत देता है कि सरकार अब इस मामले को निर्णायक मोड़ तक ले जाने की तैयारी में है।




