दोआबा न्यूज़लाइन
जालंधर: जालंधर के एस.जी.एल. सुपर स्पेशलिटी चैरिटेबल अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने एक जटिल और चुनौतीपूर्ण गायनी केस में एक महिला की बच्चेदानी को सुरक्षित रखते हुए लगभग 5 किलो वजन की बड़ी रसौली (फाइब्रॉइड) का सफल ऑपरेशन कर उसे नई जिंदगी की उम्मीद दी है।
मरीज पहले से ही एक बच्चे की मां है, लेकिन उसका बच्चा विशेष जरूरतों वाला है। परिवार भविष्य में दूसरे बच्चे की योजना बना रहा था। इस दौरान जब महिला को पेट में लगातार सूजन और दर्द रहने लगा तो परिवार के सदस्य उसे विभिन्न अस्पतालों में लेकर गए। ज्यादातर डॉक्टरों का मानना था कि इतनी बड़ी रसौली को निकालने के लिए बच्चेदानी को हटाना (हिस्टेरेक्टॉमी) जरूरी होगा। लेकिन परिवार की इच्छा थी कि किसी भी हालत में बच्चेदानी को नुकसान न पहुंचे ताकि भविष्य में महिला के मां बनने की संभावना बनी रहे। आखिरकार मरीज को एस.जी.एल. अस्पताल लाया गया, जहां गायनी विशेषज्ञ डॉ. नीलू खन्ना ने मामले की विस्तार से जांच की।
वहीं एमआरआई रिपोर्ट के अनुसार मरीज की बच्चेदानी में लगभग 25.7 × 17.3 × 23.2 सेंटीमीटर आकार की विशाल रसौली मौजूद थी, जिसके कारण बच्चेदानी नाभि से ऊपर तक फैल गई थी। इतनी बड़ी रसौली के बावजूद डॉ. नीलू खन्ना और उनकी टीम ने अत्यंत सावधानी और कुशलता के साथ ऑपरेशन कर रसौली को सफलतापूर्वक निकाल दिया और बच्चेदानी को पूरी तरह सुरक्षित रखा।
ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और अब उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। डॉक्टरों के अनुसार मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और कुछ समय बाद चिकित्सकीय सलाह के अनुसार दूसरे बच्चे की योजना भी बना सकती है। यह सफलता एस.जी.एल. अस्पताल की विशेषज्ञ गायनी टीम, आधुनिक सुविधाओं और मरीज-केंद्रित उपचार का एक और उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसने एक परिवार के भविष्य के सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।




