



दोआबा न्यूज़लाइन


मानसून सीजन में लगातार बारिश होने से जहां हर तरफ हरियाली और मौसम सुहावना हो जाता है, वहीं दूसरी तरफ ये मौसम कई बिमारियों को भी अपने साथ लेकर आता है। बारिश के मौसम में छोटे बच्चे बहुत एन्जॉय करते हैं लेकिन इस मौसम में उन्हें इन्फेक्शन का भी उतना ही खतरा बना रहता है। लेकिन कुछ खास बातों का ध्यान रखकर हम अपने बच्चों को इस मौसम में बीमार पढ़ने से बचा सकते हैं। इस मौसम में हवा में नमी, घर में सीलन, फंगस और दूषित खाना-पानी बच्चों को जल्दी बीमार कर सकते हैं। ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ (WHO) के अनुसार साफ़-सुथरा और ताजा भोजन, साफ पानी और अच्छी हाइजीन की आदतों से बच्चों में होने वाले कई संक्रमण रोके जा सकते हैं। आईये हम आगे आपको बताते हैं कि बारिश के मौसम में बच्चों की सेहत की सुरक्षा के लिए आपको किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।


बरसाती मौसम में बच्चों की सेहत की सुरक्षा के लिए रखें इन बातों का ख्याल:-

1 घर की सीलन को नजरअंदाज न करें- मानसून सीजन में अगर बच्चे को बिना सर्दी-बुखार के बार-बार रात में खांसी आती है, तो घर में सीलन, फंगस और एसी के फिल्टर की जांच करें। सीलन की बदबू छिपाने की बजाय सीलन की असल वजह समझें और उसे दूर करें। क्योंकि मानसून में घर की दीवारों की फंगस और सीलन बच्चों में खांसी, एलर्जी और अस्थमा की समस्या बढ़ा सकती है।



2 सॉफ्ट टॉयज को रेगुलर साफ़ करें – बरसात के मौसम में बच्चों के सॉफ्ट टॉयज को गर्म पानी से धोएं और अच्छी तरह सुखाएं, क्योंकि ऐसा करने से सॉफ्ट टॉयज में मौजूद करीब 90-95% डस्ट माइट्स को कम किया जा सकता है। इसलिए बरसात के मौसम में बच्चे के बिस्तर पर धोए जा सकने वाले सॉफ्ट टॉय ही रखें और उन्हें रेगुलर साफ करते रखें। ऐसा न करने से नमी के कारण सॉफ्ट टॉयज में धूल और डस्ट माइट्स जमा हो सकते हैं। जिससे एलर्जी और अस्थमा से पीड़ित बच्चों की परेशानी बढ़ सकती है।

3 बारिश में हमेशा सही फुटवियर चुनें- मानसून सीजन में रबर या एथिलीन विनाइल एसीटेट क्रॉक्स जैसे फुटवियर का इस्तेमाल करें और कैनवास या चमड़े के जूतों को अवॉयड को इस मौसम में अवॉयड करें, क्योंकि यह जल्दी नहीं सकते और नमी कम सोखते हैं। फंगल इन्फेक्शन से बचें के लिए जरूरी है कि बच्चे के पैर भी साफ और सूखे रहें। उंगलियों के बीच की जगह अच्छी तरह सुखाएं और गीले जूते या मोजे लंबे समय तक न पहनने दें।

4 बच्चों को ताजा और साफ़-सुथरा भोजन खाने को दें- बरसाती मौसम में बच्चों को बाहर के कटे हुए फल, सड़क किनारे मिलने वाले जूस और बर्फ वाले ड्रिंक्स न दें। क्योंकि इनमें संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है। इसके साथ ही बच्चों को इस मौसम में कच्चा सलाद और हरी पत्तेदार सब्जियों को साफ पानी से अच्छी तरह धोकर खाने के लिए दें। बच्चों को हमेशा ताजा और सही तरीके से स्टोर किया हुआ दही और छाछ दें। उल्टी या दस्त होने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।
5 सही जगह रखें टूथब्रश- एक और बात का ध्यान रखें कि बाथरूम में टूथब्रश टॉयलेट या वॉशबेसिन के पास न रखें। इसके साथ ही ब्रश को धोकर सीधा रखें, ताकि वह अच्छी तरह सूख सके। वहीं फ्लश करते समय टॉयलेट का ढक्कन बंद रखें और ब्रश पर कैप लगाने की बजाय उसे खुली हवा में सूखने दें। यात्रा के दौरान केवल ब्रश कैप का इस्तेमाल करें।
6 सिर्फ आयरन पर न करें भरोसा- अगर आप सोच रहे हैं कि सिर्फ कपड़ों पर आयरन कर देने से फंगस पूरी तरह खत्म हो जाएगी तो ऐसा बिलकुल नहीं है। बारिश या पसीने से भीगे कपड़ों को अच्छी तरह धोकर सुखाना जरूरी है। वहीं नमी वाले कपड़े बिना सुकाए अलमारी में रखने से फंगस बढ़ सकती है।
7 AC का ड्राई मोड इस्तेमाल करें- अगर घर में सीलन या नमी ज्यादा हो, तो मानसून में AC का ड्राई मोड या डिह्यूमिडिफायर इस्तेमाल करना लाभदायक रहेगा। इससे नमी कम होती है, जिससे फंगस और डस्ट माइट्स पनपने की संभावना घटती है। इसके साथ ही हमेशा एसी का तापमान 24–26°C रखें, कमरे को जरूरत से ज्यादा ठंडा न करें और एसी फिल्टर की सफाई रेगुलर करें।





