Home जालंधर अंधेरे में परखी गई जालंधर की सुरक्षा: 2 मिनट तक गूंजता रहा सायरन, ‘ब्लैकआउट’ के बीच सिविल डिफेंस ने जांची आपातकालीन ताकत

अंधेरे में परखी गई जालंधर की सुरक्षा: 2 मिनट तक गूंजता रहा सायरन, ‘ब्लैकआउट’ के बीच सिविल डिफेंस ने जांची आपातकालीन ताकत

by Doaba News Line

जालंधर: शुक्रवार की रात जालंधर के एक हिस्से में वक्त जैसे अचानक ठहर गया। केंद्र सरकार के आदेशों पर जब ठीक रात 8:00 बजे ‘एयर रेड वार्निंग सायरन’ की तीखी आवाज गूंजी, तो शहर को किसी अनहोनी का नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण सुरक्षा अभ्यास का अहसास हुआ। युद्ध जैसी स्थितियों और बड़ी आपातकालीन आपदाओं से निपटने के लिए प्रशासन ने ‘मॉक ड्रिल’ के जरिए अपनी तैयारियों को कसौटी पर परखा।

खालसा कॉलेज बना ‘वॉर रूम’: 15 मिनट तक छाया रहा सन्नाटा, बंद कर दी गईं लाइटें

इस विशेष ड्रिल का केंद्र जालंधर का खालसा कॉलेज फॉर वुमेन बना। अभ्यास के दौरान रात 8:00 से 8:15 बजे तक पूरे परिसर और आसपास के चिह्नित दायरे में पूर्ण ‘ब्लैकआउट’ किया गया। सायरन बजते ही लोगों ने अपने घरों और प्रतिष्ठानों की लाइटें बंद कर दीं। डीसी वरजीत वालिया की निगरानी में हुए इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य यह देखना था कि पूरी तरह अंधेरा होने की स्थिति में सिविल डिफेंस की टीमें कितनी तेजी और सटीकता से रेस्क्यू ऑपरेशन और सुरक्षा व्यवस्था को अंजाम दे सकती हैं।

हाई और लो पिच सायरन से ‘अलर्ट’ मोड में आया प्रशासन

ड्रिल की शुरुआत 2 मिनट लंबे हाई और लो पिच सायरन से हुई, जो किसी भी हवाई हमले या बड़े खतरे का पारंपरिक संकेत माना जाता है। इस दौरान प्रशासनिक मशीनरी, एम्बुलेंस और सुरक्षा इकाइयां पूरी तरह सक्रिय नजर आईं। सिविल डिफेंस के वॉलंटियर्स ने अंधेरे के बीच अपनी मूवमेंट और समन्वय का प्रदर्शन किया। प्रशासन ने इस ड्रिल को ‘लिमिटेड एरिया’ तक सीमित रखा था ताकि आम जनजीवन पर इसका बड़ा असर न पड़े और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टाइम का सही डेटा जुटाया जा सके।

घबराएं नहीं, यह सुरक्षा की ‘रिहर्सल’ है: डीसी

डिप्टी कमिश्नर वरजीत वालिया ने स्पष्ट किया कि यह अभ्यास केवल भविष्य की किसी भी संभावित चुनौती के लिए खुद को तैयार रखने का एक हिस्सा है। उन्होंने कहा कि सायरन की आवाज और ब्लैकआउट केवल मॉक ड्रिल का हिस्सा थे, जिससे घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। इस रिहर्सल के जरिए प्रशासन ने न केवल अपनी कार्यक्षमता जांची, बल्कि लोगों को भी यह संदेश दिया कि संकट के समय शांत रहकर प्रशासन का सहयोग करना कितना महत्वपूर्ण है।

 

 

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