



दोआबा न्यूज़लाइन


जालंधर: जालंधर नगर निगम का बिल्डिंग विभाग इन दिनों गंभीर स्टाफ संकट से जूझ रहा है। शहर में लगातार बढ़ रहे अवैध निर्माणों के बावजूद पूरे नगर निगम क्षेत्र की निगरानी के लिए केवल 2 बिल्डिंग इंस्पेक्टर ही तैनात हैं। ऐसे में अवैध निर्माणों पर प्रभावी कार्रवाई करना विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।


जानकारी के अनुसार, नगर निगम ने शहर को लगभग 20 सेक्टरों में बांटा हुआ है और प्रत्येक सेक्टर के लिए एक बिल्डिंग इंस्पेक्टर की व्यवस्था का प्रावधान है। लेकिन वर्तमान में अधिकांश पद खाली पड़े हैं और पूरे शहर का जिम्मा केवल दो अधिकारियों के कंधों पर है। यही वजह है कि अवैध निर्माणों की शिकायतों का समय पर निपटारा नहीं हो पा रहा है।
स्थिति और भी चिंताजनक इसलिए है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में नगर निगम की सीमा का विस्तार हुआ है और नए क्षेत्रों के जुड़ने के बाद निर्माण गतिविधियों में तेजी आई है। इसके बावजूद बिल्डिंग विभाग में न तो पर्याप्त भर्ती हुई और न ही स्टाफ बढ़ाया गया। कई अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां संभालनी पड़ रही हैं, जिससे निरीक्षण और कार्रवाई की रफ्तार प्रभावित हो रही है।


सूत्रों का कहना है कि स्टाफ की कमी के कारण शहर में अवैध निर्माणों की संख्या लगातार बढ़ रही है। शिकायतें मिलने के बाद भी विभाग कई मामलों में तत्काल कार्रवाई नहीं कर पाता, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ अनियमित निर्माणों को भी बढ़ावा मिल रहा है।
विभाग पर समय-समय पर अवैध निर्माणों को लेकर लापरवाही और मिलीभगत के आरोप भी लगते रहे हैं। हालांकि अधिकारी स्टाफ की कमी को सबसे बड़ी वजह बताते हैं। शहर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं और बिल्डिंग क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी सरकार से खाली पदों को जल्द भरने और बिल्डिंग विभाग को मजबूत करने की मांग की है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नगर निगम प्रशासन बिल्डिंग विभाग में खाली पदों को कब तक भरता है और अवैध निर्माणों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त स्टाफ के बिना शहर में अवैध निर्माणों पर लगाम लगाना आसान नहीं होगा।



