



दोआबा न्यूज़लाइन


जालंधर: पंजाब में एक हृदय रोग विशेषज्ञ के रूप में अपने 35 वर्षों के अभ्यास के दौरान मैंने हृदय रोगों के इलाज में बहुत बड़ा बदलाव देखा है। यह कहना है केयर बेस्ट सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रमन चावला का। उन्होंने अपने 35 सालों के तजुर्बे का अनुभव साझा करते हुए कहा कि हमने बैलून एंजियोप्लास्टी के शुरुआती दौर से लेकर आधुनिक स्टेंट, इंट्रावैस्कुलर इमेजिंग, जटिल कोरोनरी इंटरवेंशन और एडवांस्ड एंडोवस्कुलर उपचार तक बहुत प्रगति की है। लेकिन इसके साथ एक और चिंताजनक बदलाव भी सामने आया है वह यह है कि आज के समय में हृदय रोग अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गया है, बल्कि अब 30 और 40 वर्ष की उम्र के लोगों में भी अचानक हार्ट अटैक से मृत्यु और हृदय की धमनियों में गंभीर ब्लॉकेज के मामले देखने को मिल रहे हैं।


उन्होंने आगे कहा कि युवा भारतीयों में किए गए अध्ययनों में धूम्रपान, तंबाकू का सेवन, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, अस्वस्थ खान-पान और शारीरिक गतिविधि की कमी को महत्वपूर्ण जोखिम कारक पाया गया है। कई बार जो लोग खुद को “हृदय रोग के लिए अभी बहुत कम उम्र का” मानते हैं, वे पहली बार ही हार्ट अटैक के साथ अस्पताल पहुंच जाते हैं। वास्तव में हार्ट अटैक अचानक हो सकता है- लेकिन बीमारी अक्सर अचानक नहीं होती। कोलेस्ट्रॉल का जमा होना और एथेरोस्क्लेरोसिस कई वर्षों तक चुपचाप बढ़ सकते हैं। इसलिए छाती में दर्द न होना इस बात की गारंटी नहीं है कि हृदय पूरी तरह स्वस्थ है।
डॉ चावला ने आगे कहा कि कोई व्यक्ति देखने में फिट, काम में सक्रिय और सामान्य जीवन जी रहा हो, फिर भी उसमें हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या प्री-डायबिटीज, बढ़ा हुआ एलडीएल कोलेस्ट्रॉल या ट्राइग्लिसराइड, कम एचडीएल कोलेस्ट्रॉल, सिगरेट या तंबाकू का सेवन, पेट के आसपास अधिक चर्बी, बैठे रहने वाली जीवनशैली, लंबे समय का तनाव, पर्याप्त नींद की कमी, अस्वस्थ खान-पान और परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास जैसे जोखिम मौजूद हो सकते हैं। यह बिना जानकारी के बम पर बैठे रहने जैसा है। अच्छी बात यह है कि इनमें से कई जोखिम कारकों की समय रहते पहचान की जा सकती है और बड़े हृदय रोग से पहले इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए लक्षणों का इंतज़ार न करें।


उन्होंने आगे कहा कि प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी का उद्देश्य बीमारी होने से पहले जोखिम की पहचान करना है। अपने हृदय के जोखिम की जांच कराने का सबसे अच्छा समय वह है जब आप अभी हृदय रोगी नहीं बने हैं। ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, लिपिड प्रोफाइल, शरीर का वजन और कमर का घेरा कुछ सरल जांचें हैं, लेकिन ये भविष्य में हृदय रोग के जोखिम के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकती हैं। उम्र, लक्षण, पारिवारिक इतिहास और व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार ईसीजी, इकोकार्डियोग्राफी या अन्य आवश्यक हृदय जांचों की जरूरत पड़ सकती है, विशेष रूप से उन लोगों में जिन्हें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान की आदत, मोटापा या परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक का इतिहास हो।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग सोचते हैं कि “मैं तो केवल 35 या 40 साल का हूं” अब पर्याप्त समय नहीं है। यह सोच कि हृदय की जांच केवल 50 या 60 वर्ष की उम्र के बाद ही करानी चाहिए, सही नहीं है। भारतीयों में 30 वर्ष से कम उम्र में भी कोरोनरी आर्टरी बीमारी के मामले सामने आए हैं। इनमें हार्ट अटैक एक आम प्रस्तुति थी, जबकि धूम्रपान और कोलेस्ट्रॉल की गड़बड़ी महत्वपूर्ण जोखिम कारक पाए गए। युवा भारतीय वयस्कों में अचानक होने वाली मौतों के अध्ययनों में भी हृदय रोग एक महत्वपूर्ण कारण के रूप में सामने आया है। कम उम्र कोरोनरी आर्टरी बीमारी से सुरक्षा की गारंटी नहीं है।
डॉ चावला ने कहा कि बचाव, इलाज से ज्यादा शक्तिशाली है। उन्होंने बताया कि आधुनिक कार्डियोलॉजी हार्ट अटैक के दौरान बंद धमनी को खोलकर, स्टेंट डालकर और रक्त प्रवाह बहाल करके हृदय को बचा सकती है। लेकिन सबसे बड़ी सफलता हार्ट अटैक को पहले ही रोकना है। इसी उद्देश्य से केयर बेस्ट सुपरस्पेशलिटी अस्पताल ने स्पेशल प्रिवेंटिव हेल्थ एंड कार्डियक इवैल्यूशन पैकेजेस शुरू किए हैं, जिनके माध्यम से जोखिम कारकों की जांच, समस्याओं की जल्दी पहचान और समय पर चिकित्सकीय सलाह मिल सकती है, ताकि जरूरत के अनुसार जीवनशैली में बदलाव या उपचार समय रहते शुरू किया जा सके।
केयर बेस्ट सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल का संदेश है-“अपने नंबर जानें, अपना जोखिम जानें और अपने हृदय की रक्षा करें।” हर व्यक्ति, जो खुद को स्वस्थ मानता है, उसे भी अपना ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की स्थिति पता होनी चाहिए। कामकाजी लोगों, व्यापारियों, शिक्षकों, सरकारी कर्मचारियों और अपना व्यवसाय चलाने वाले लोगों के लिए नियमित ओपीडी के समय प्रिवेंटिव कंसल्टेशन के लिए समय निकालना अक्सर मुश्किल होता है। मरीजों और परिवारों की मांग को ध्यान में रखते हुए केयर बेस्ट सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, जालंधर ने इवनिंग कार्डियोलॉजी ओपीडी शुरू की है। इससे लोग कामकाज के बाद अपनी सुविधा के अनुसार कार्डियोलॉजी कंसल्टेशन और प्रिवेंटिव इवैल्यूएशन करवा सकते हैं। यह ओपीडी विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो व्यस्तता के कारण अपनी हृदय जांच लगातार टालते आ रहे हैं।
डॉ चावला का युवा पीढ़ी के लिए अंतिम संदेश: पंजाब में तीन दशकों से अधिक समय तक हृदय रोग का इलाज करने के बाद मेरा संदेश बिल्कुल सीधा है: अपने हृदय की चेतावनी का इंतज़ार न करें। यदि आप सिगरेट या तंबाकू का सेवन करते हैं, आपको डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल है, आपका वजन अधिक है, आपकी जीवनशैली सेडेंटरी या स्ट्रेसफुल है या परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास है, तो भले ही आप बिल्कुल ठीक महसूस कर रहे हों, फिर भी अपने डॉक्टर से कार्डियोवैस्कुलर रिस्क के बारे में सलाह लें।
डॉ ने कहा कि छाती में दबाव या भारीपन, बिना किसी स्पष्ट कारण सांस फूलना, असामान्य पसीना आना, बांह या जबड़े की ओर जाने वाला दर्द या अचानक एक्सरसाइज कैपेसिटी कम होना जैसे लक्षणों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अचानक या लगातार ऐसे लक्षण होने पर रूटीन ओपीडी का इंतज़ार करने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय जांच करवानी चाहिए। जल्दी पहचान → जल्दी बचाव → स्वस्थ हृदय → स्वस्थ जीवन हम अपनी उम्र या अपनी आनुवंशिक विरासत को नहीं बदल सकते। लेकिन हम ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित कर सकते हैं। हम तंबाकू छोड़ सकते हैं, शारीरिक रूप से सक्रिय हो सकते हैं, अपने खान-पान में सुधार कर सकते हैं, वजन नियंत्रित रख सकते हैं और सही समय पर चिकित्सकीय सलाह ले सकते हैं।
डॉ रमन चावला ने कहा कि मेरी व्यक्तिगत राय में, भविष्य की कार्डियोलॉजी की सफलता को केवल इस बात से नहीं मापा जाना चाहिए कि हमने कितनी बंद धमनियों को सफलतापूर्वक खोला, बल्कि इस बात से भी मापा जाना चाहिए कि हम कितने हार्ट अटैक होने से सफलतापूर्वक रोक पाए।



