




दोआबा न्यूज़लाइन
जालंधर: शहर के डीएवी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (डेविएट) के रिसर्च, इनोवेशन एंड कंसल्टेंसी (आरआईसी) सेल ने एप्लाइड साइंसेज विभाग के सहयोग से “विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन के उभरते क्षेत्रों में गणित के अनुप्रयोग” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किया।




इस अवसर पर हंस राज महिला महाविद्यालय के स्नातकोत्तर गणित विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. गगन दीप मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहीं। व्याख्यान में गणित की विभिन्न विषयों में उपयोगिता तथा आधुनिक शोध एवं तकनीकी विकास में इसकी भूमिका पर चर्चा की गई।
सत्र में एयरोस्पेस, पर्यावरण विज्ञान, जैव-चिकित्सा, कृषि, भूकंप इंजीनियरिंग, संरचनात्मक अभिकल्पना और प्रबंधन में गणित के व्यावहारिक उपयोगों को उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया। इसके अतिरिक्त, संख्या सिद्धांत, क्रिस्टलोग्राफी, डेटा साइंस, वित्तीय विश्लेषण तथा संख्यात्मक पहचान प्रणालियों के सत्यापन में गणित की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। व्याख्यान ने शिक्षण एवं अनुसंधान में अनुप्रयोग-आधारित दृष्टिकोण अपनाने की संभावनाओं को रेखांकित किया।
वहीं डॉ. कंचन एल. सिंह, डीन, आरआईसी एवं प्रमुख, एप्लाइड साइंसेज विभाग ने मुख्य वक्ता का स्वागत करते हुए इस शैक्षणिक पहल के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने गणित को विभिन्न विषयों के साथ जोड़कर समझने की आवश्यकता पर बल दिया तथा शिक्षकों को सैद्धांतिक अवधारणाओं और व्यावहारिक परिस्थितियों के बीच संबंध स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के निरंतर व्यावसायिक विकास के लिए नए विचारों को अपनाना और अपने ज्ञान का विस्तार करना आवश्यक है। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक आयोजनों के माध्यम से ज्ञानवर्धन और अकादमिक सहभागिता को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।


डॉ. संदीप विज, डायरेक्टर-कम-प्रिंसिपल ने डॉ. गगन दीप का स्वागत करते हुए संकाय सदस्यों के साथ अपना ज्ञान साझा करने के लिए उनका धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि गणितीय चिंतन विज्ञान, इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी और प्रबंधन की जटिल समस्याओं को समझने तथा उनके समाधान खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बदलते शैक्षणिक और तकनीकी परिदृश्य के अनुरूप शिक्षकों को अपने ज्ञान और कौशल को निरंतर अद्यतन रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार, प्रभावी शिक्षा का उद्देश्य केवल सैद्धांतिक अवधारणाओं का ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को उन अवधारणाओं की वास्तविक जीवन में उपयोगिता समझने में भी सक्षम बनाना है।
आगे उन्होंने कहा कि विभिन्न विषयों के बीच संवाद शिक्षकों को अपने पारंपरिक विषय-क्षेत्र से आगे सोचने और शिक्षण की नई पद्धतियों को विकसित करने के अवसर प्रदान करता है। ऐसे आयोजन संकाय सदस्यों के बीच विचारों के आदान-प्रदान, शोध सहयोग और नवाचार की संभावनाओं को मजबूत करते हैं। उन्होंने शिक्षकों को इन मंचों का उपयोग करके अपनी शिक्षण प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने तथा समकालीन आवश्यकताओं के अनुरूप शोध गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रेरित किया।
आगे उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अंतर्विषयी सहयोग विद्यार्थियों में विश्लेषणात्मक क्षमता, तार्किक चिंतन और निर्णय लेने के कौशल को विकसित करने में सहायक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की पहल संस्थान में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार की संस्कृति को और सुदृढ़ करेगी। मुख्य वक्ता डॉ. गगन दीप ने संस्थान, आरआईसी सेल और उपस्थित संकाय सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने शुद्ध एवं अनुप्रयुक्त गणित के पारस्परिक संबंधों को स्पष्ट करते हुए दैनिक जीवन तथा विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों से उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होंने एयरोस्पेस, पर्यावरण, जैव-चिकित्सा, कृषि, भूकंप विश्लेषण, संरचनात्मक इंजीनियरिंग और प्रबंधन में गणित की उपयोगिता समझाई। उन्होंने क्रिस्टलोग्राफी तथा पहचान संख्याओं के सत्यापन में संख्या सिद्धांत की भूमिका पर भी चर्चा की। व्याख्यान के साहित्यिक पक्ष को जोड़ते हुए उन्होंने अपनी स्वरचित कविता “मैथमेटिक्स” का पाठ किया।
इस अवसर पर मुख्य वक्ता के प्रति सम्मान एवं आभार व्यक्त करने के लिए डॉ. कंचन एल. सिंह, डॉ. रजनी शर्मा, डॉ. नीरू शर्मा, डॉ. पायल शर्मा, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. सुनील सचदेवा और डॉ. गौरव धूरिया ने उन्हें स्मृति-चिह्न भेंट किया। कार्यक्रम में एप्लाइड साइंसेज, मैनेजमेंट, कंप्यूटर एप्लीकेशंस, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग विभागों के संकाय सदस्यों ने भाग लिया।
इस विशेषज्ञ व्याख्यान ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और प्रबंधन के उभरते क्षेत्रों में गणित की व्यावहारिक उपयोगिता के प्रति जागरूकता बढ़ाई। साथ ही, इसने शिक्षकों को अनुप्रयोग-आधारित शिक्षण, अंतर्विषयी अनुसंधान, नवाचार और अकादमिक सहयोग की संभावनाओं पर विचार करने के लिए प्रेरित किया।



