Home एजुकेशन DAV की एक और बड़ी उपलब्धि, PSCST ने वर्मीकम्पोस्टिंग परियोजना को दी स्वीकृति

DAV की एक और बड़ी उपलब्धि, PSCST ने वर्मीकम्पोस्टिंग परियोजना को दी स्वीकृति

by Doaba News Line

दोआबा न्यूज़लाइन

जालंधर: शहर के डी.ए.वी. कॉलेज ने पर्यावरण संरक्षण एवं सतत् जीवन शैली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर सिद्ध किया है। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम (ई.ई.पी.) 2026–27 के अंतर्गत पंजाब राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् (पीएससीएसटी), चंडीगढ़ ने महाविद्यालय की परियोजना ‘अपशिष्ट से संपदा: वर्मीकम्पोस्टिंग पर कार्यशाला’ को स्वीकृति प्रदान की है।

इस परियोजना के अंतर्गत जालंधर एवं कपूरथला जिलों के 100 विद्यालयों के शिक्षकों के लिए क्षमता-विकास कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। प्रस्तावित प्रशिक्षण नवंबर 2026 में आयोजित होगा। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य व्यावहारिक वर्मीकम्पोस्टिंग तकनीकों, अपशिष्ट प्रबंधन तथा जैव-अपघटनीय कचरे को उपयोगी संसाधन में परिवर्तित करने के उपायों से शिक्षकों को परिचित कराना है। इसके माध्यम से जमीनी स्तर पर पर्यावरण-अनुकूल एवं सतत् कार्य-पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

इस परियोजना का नेतृत्व डॉ. कोमल अरोड़ा, विभागाध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान विभाग एवं समन्वयक, इको-क्लब द्वारा किया जाएगा। यह कार्य प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न होगा। डॉ. कोमल अरोड़ा ने पंजाब के 19 जिलों में डी.ए.वी. विद्यालयों के लिए अनेक अंतर-महाविद्यालयीय एवं अंतर-विद्यालयीय पर्यावरणीय पहल तथा व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किए हैं। उनके इन प्रयासों से संस्थान को विभिन्न स्तरों पर पहचान एवं सम्मान प्राप्त हुआ है। वर्तमान परियोजना की स्वीकृति पर्यावरण शिक्षा के क्षेत्र में उनके निरंतर प्रयासों की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

प्राचार्य डॉ. अनूप कुमार ने डी.ए.वी. कॉलेज, जालंधर के प्रति निरंतर विश्वास एवं सहयोग के लिए पंजाब राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद्, चंडीगढ़ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि परिषद् ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सार्थक पहल करने के लिए महाविद्यालय को सदैव प्रोत्साहित किया है। उन्होंने सतत् जीवन-पद्धतियों में व्यापक समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए महाविद्यालय के इको-क्लब के समर्पित प्रयासों की सराहना की। उन्होंने पर्यावरण के प्रति जागरूक समुदायों के निर्माण तथा सतत् जीवनशैली के सिद्धांतों को व्यावहारिक कार्यों में परिणत करने के लिए महाविद्यालय की प्रतिबद्धता को दोहराया।

 

 

You may also like

Leave a Comment