



दोआबा न्यूज़लाइन
ड्रोन, सीमा, अंतरराज्यीय नेटवर्क और ड्रग मनी पर केंद्र सरकार जवाब दे; पंजाब को भाषण नहीं, पूरी सप्लाई चेन पर कार्रवाई चाहिए




जालंधर: पंजाब में बढ़ते नशे के संकट पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव, पूर्व कैबिनेट मंत्री और विधायक पद्मश्री परगट सिंह ने केंद्र की भाजपा सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी राजनीतिक दल को कटघरे में खड़ा करने से कहीं बड़ा है। यह पंजाब के नौजवानों, पंजाब के परिवारों और देश की राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है।
परगट सिंह ने कहा कि पंजाब के लोग वर्षों से नशे के खिलाफ लड़ रहे हैं। सरकारें आती-जाती रही हैं, लेकिन आज भी सबसे बड़ा सवाल वही है- नशा पंजाब तक पहुंच कैसे रहा है और उस पूरी सप्लाई चेन को तोड़ने की जिम्मेदारी किसकी है?
उन्होंने कहा कि जब सीमा पार से ड्रोन के माध्यम से नशीले पदार्थ पंजाब में पहुंचने की बात सामने आती है, तो केंद्र सरकार को केवल बरामदगी और गिरफ्तारी के आंकड़े बताने के बजाय पूरे नेटवर्क की तस्वीर देश के सामने रखनी चाहिए। केंद्र सरकार स्वयं पंजाब सीमा पर ड्रोन विरोधी प्रणालियों की तैनाती और बीएसएफ, वायुसेना तथा स्थानीय पुलिस के बीच सूचना साझा करने की व्यवस्था की जानकारी संसद में दे चुकी है।


परगट सिंह ने केंद्र सरकार से सीधे सवाल किये:
पहला—अगर सरकार के पास आधुनिक एंटी-ड्रोन तकनीक, बीएसएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मौजूद हैं, तो ड्रोन के जरिए होने वाली तस्करी की पूरी श्रृंखला को प्रभावी ढंग से रोकने में अभी तक क्या कमी रह गई है?
दूसरा—ड्रोन को डिटेक्ट, ट्रैक और न्यूट्रीलाइस करने के लिए सरकार ने तकनीक और मैनपावर को लेकर क्या स्पष्ट रणनीति बनाई है? केवल ड्रोन बरामद करना पर्याप्त नहीं है। यह पता लगाना भी जरूरी है कि उन्हें कौन संचालित कर रहा है, उनके पीछे कौन है और पंजाब में कंसिगनमेंट्स किस नेटवर्क के माध्यम से पहुंच रही हैं।
तीसरा- केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की जिम्मेदारी क्या है? यदि नशे का नेटवर्क पंजाब से आगे हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और दूसरे राज्यों तक फैला हुआ है, तो उस पूरे इंटरस्टेट नेटवर्क को आईडेंटिफाई करने और डिस्मेंटल करने के लिए कौन-सी कोऑर्डिनेटेड स्ट्रेटेजी काम कर रही है?
उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सीमा पर शुरू और पंजाब में खत्म नहीं होती। यह एक विस्तृत सप्लाई चैन है, जिसमें सीमा पार के स्रोत, ड्रोन नेटवर्क, परिवहन, स्थानीय वितरण, वित्तीय नेटवर्क और संगठित अपराध शामिल हो सकते हैं। केंद्र सरकार के अपने ढांचे में एनसीबी को केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच कोऑर्डिनेशन, इंटेलिजेंस कलेक्शन तथा ड्रग ट्रैफिकिंग से जुड़े फाइनेंसियल एसेट्स को टारगेट करने की जिम्मेदारी दी गई है।
परगट सिंह ने इसी संदर्भ में पूछा, “क्या केंद्रीय एजेंसियों ने इस पूरे नेटवर्क की फाइनेंशियल इन्वेस्टीगेशन की है? ड्रग मनी की मनी ट्रेल, शैल कम्पनीज , बेनामी एसेट्स और प्रोसेड्स ऑफ़ क्राइम तक पहुंचने के लिए ईडी, एनसीपी, कस्टम्स और अन्य केंद्रीय एजेंसियों के बीच वास्तविक कोऑर्डिनेशन कितना प्रभावी है?”
उन्होंने कहा कि अगर किसी नेटवर्क का पैसा पकड़ा नहीं जाता, उसके फाइनेंसर्स तक नहीं पहुंचा जाता और उसकी संपत्ति जब्त नहीं होती, तो केवल छोटे स्तर के आरोपियों की गिरफ्तारी से नशे का कारोबार खत्म नहीं होगा।
उन्होंने पोर्ट्स को लेकर भी केंद्र सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा। “अगर देश के अलग-अलग पोर्ट्स पर इललीगल कंसिगनमेंट्स की तस्करी रोकना केंद्रीय एजेंसियों की जिम्मेदारी का हिस्सा है, तो पंजाब तक पहुंचने वाले इंटरस्टेट रुट्स और सप्लाई चैन्स को ट्रेस करने के लिए कौन-सा इंटीग्रेटेड मैकेनिज्म काम कर रहा है?”
परगट सिंह ने बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को लेकर भी केंद्र से जवाब मांगा। पंजाब सहित कुछ सीमावर्ती राज्यों में अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे क्षेत्र में बीएसएफ का क्षेत्राधिकार केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया गया है और केंद्र ने संसद में इसे ट्रांस बॉर्डर क्राइम से निपटने के लिए राज्य पुलिस के साथ कोआर्डिनेशन के संदर्भ में बताया है।
उन्होंने पूछा, “जब केंद्र ने सीमा क्षेत्र में बीएसएफ की भूमिका और जुरिस्डिक्शन को मजबूत किया है, तो उस व्यवस्था की परफॉर्मेंस और अकाउंटेबिलिटी का स्वतंत्र मूल्यांकन कब किया जाएगा? पंजाब के लोगों को यह जानने का अधिकार है कि सीमा पार नशे की तस्करी रोकने में व्यवस्था कहां सफल हुई और कहां विफल।”
परगट सिंह ने इस पूरे संकट को केवल पंजाब की कानून-व्यवस्था का विषय मानने से भी इनकार किया। उन्होंने कहा कि सीमा पार तस्करी, नार्को टेररिज्म, अंतरराज्यीय संगठित अपराध और ड्रग फाइनेंसिंग का संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा से है। केंद्र सरकार स्वयं संसद में विदेशी तत्वों द्वारा पंजाब और जम्मू-कश्मीर की ओर नारकोटिक्स पुश किए जाने और इससे नार्को टेररिज्म के खतरे का उल्लेख कर चुकी है। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार इसे नेशनल सिक्योरिटी इशू मानती है, तो फिर पंजाब के साथ इस लड़ाई को केवल एक राज्य का कानून-व्यवस्था का मुद्दा क्यों माना जाए?
परगट सिंह ने जेलों और संगठित अपराध के नेक्सस पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि यदि गैंगस्टर और ओर्गनइजेड क्राइम नेटवर्क्स नशे के कारोबार से जुड़े हुए हैं, तो जेल इंटेलिजेंस, प्रीसन सिक्योरिटी और सेंट्रल स्टेट इंटेलिजेंस कोआर्डिनेशन को मजबूत करने के लिए क्या इंटीग्रेटेड मैकेनिज्म लागू किया गया है।
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदलते सिक्योरिटी एनवायरनमेंट और टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन और डिजिटल नेटवर्क्स का इस्तेमाल करने वाले ड्रग ट्रैफ़िकेर्स और फाइनेंसर्स की निगरानी भी आधुनिक एंटी नारकोटिक्स स्ट्रेटेजी का हिस्सा होनी चाहिए। आज अपराधी तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। सरकार की प्रतिक्रिया भी उसी स्तर की होनी चाहिए। केवल पुराने तरीकों से नई चुनौती का मुकाबला नहीं किया जा सकता,” उन्होंने कहा।
परगट सिंह ने पंजाब सरकार की भूमिका को लेकर भी स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। पुलिसिंग, स्थानीय डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क्स, उपचार, रिहैबिलिटेशन और ग्राउंड लेवल एनफोर्समेंट पंजाब सरकार की जिम्मेदारियां हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र को एक-दूसरे पर दोष डालने के बजाय एक सिंगल, अकाउंटेबल कमांड एंड कोऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क के तहत काम करना चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से भी सवाल किया कि क्या पंजाब सरकार ने केंद्र की एजेंसियों के साथ मिलकर नशे की पूरी सप्लाई चैन का डिस्ट्रिक्ट वाइज और नेटवर्क-वाइज असेसमेंट किया है? उन्होंने कहा कि पंजाब के परिवारों को राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि मेयरएबल एक्शन और परिणाम चाहिए।
परगट सिंह ने कहा कि बीजेपी और ‘आप’ दोनों को इस मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठना होगा। “केंद्र सीमा और राष्ट्रीय नेटवर्क की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकता और पंजाब सरकार स्थानीय एनफोर्समेंट और रिहैबिलिटेशन की जिम्मेदारी से पंजाब के नौजवानों की जिंदगी को पोलिटिकल ब्लेम गेम का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता।”
उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग सरकारों से केवल एक सवाल पूछ रहे हैं कि नशा बेचने वाले छोटे व्यक्ति तक कार्रवाई कब पहुंचेगी, यह नहीं; उस नशे को पंजाब तक पहुंचाने वाले पूरे नेटवर्क तक कार्रवाई कब पहुंचेगी?
परगट सिंह ने कहा कि कांग्रेस पंजाब के युवाओं और परिवारों की आवाज को मजबूती से उठाती रहेगी और केंद्र तथा राज्य दोनों सरकारों से स्रोत से लेकर अंतिम वितरण तक पूरी ड्रग सप्लाई चैन की जवाबदेही तय करने की मांग करती रहेगी।
उन्होंने कहा, “पंजाब को नारों की नहीं, परिणामों की जरूरत है। हमारे नौजवान किसी राजनीतिक अभियान का विषय नहीं हैं। उनका भविष्य हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। केंद्र सरकार को अब जवाब देना होगा—सीमा से लेकर ड्रग मनी तक, ड्रोन से लेकर ऑर्गनाइज्ड नेटवर्क्स तक, आखिर पूरी सप्लाई चैन को तोड़ने की जवाबदेही किसकी है?”
उस नशे को पंजाब तक पहुंचाने वाले पूरे नेटवर्क तक कार्रवाई कब पहुंचेगी- परगट सिंह
आगे परगट सिंह ने यह भी कहा कि कांग्रेस पंजाब के युवाओं और परिवारों की आवाज को मजबूती से उठाती रहेगी और केंद्र तथा राज्य दोनों सरकारों से स्रोत से लेकर अंतिम वितरण तक पूरी ड्रग सप्लाई चैन की जवाबदेही तय करने की मांग करती रहेगी।
उन्होंने कहा, “पंजाब को नारों की नहीं, परिणामों की जरूरत है। हमारे नौजवान किसी राजनीतिक अभियान का विषय नहीं हैं। उनका भविष्य हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। केंद्र सरकार को अब जवाब देना होगा- सीमा से लेकर ड्रग मनी तक, ड्रोन से लेकर ऑर्गनाइज्ड नेटवर्क्स तक, आखिर पूरी सप्लाई चेन को तोड़ने की जवाबदेही किसकी है?”
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में विशेष रूप से राजिंदर बेरी, जिला अध्यक्ष, कांग्रेस कमेटी जालंधर; डॉ. नवजोत दहिया, हलका इंचार्ज, नकोदर, अवतार सिंह जूनियर (बावा हैनरी), विधायक, जालंधर नॉर्थ; ईशान त्यागी, मीडिया कोऑर्डिनेटर, ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी, करण सुमन, वाइस प्रेसिडेंट, जिला कांग्रेस (अर्बन), जालंधर एवं एडवोकेट हरनीत सिंह लाली उपस्थित रहे।



