




दोआबा न्यूज़लाइन
देश : दीपावली का दिन जिस दिन हर घर में दीपों की रोशनी होती है। चारों ओर खुशियां ही खुशियां बिखरने वाले इस त्योहार को भारतीय संस्कृति और धर्म का सबसे प्रमुख और पावन त्योहार कहा जाता है। यह कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। इस दिन लोग बहुत खुश होते हैं। दीपावली के दिन माँ लक्ष्मी और विघ्नहर्ता गणपति गणेश जी की पूजा अर्चना की जाती है, मान्यता है कि पूजा करने से लक्ष्मी जी और गणेश जी प्रसन्न होकर अपने भक्तों पर अपनी आपार कृपा बरसाते है। दीपावली समाज में भाईचारे और समरसता का संदेश देती है। इस दिन लोग अपने गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं, जिससे रिश्तों में मिठास बढ़ती है।



इस दिन को लेकर कई पौराणिक कथाएं भी हैं….
दीपावली का इतिहास रामायण से भी जुड़ा हुआ है, ऐसा माना जाता है कि श्री राम चन्द्र जी ने माता सीता को रावण की कैद से छुड़ाया तथा उनकी अग्नि परीक्षा के उपरान्त, 14 वर्ष का वनवास व्यतीत कर अयोध्या वापस लोटे थे। अयोध्या वासियों ने श्री राम चन्द्र जी, माता सीता, तथा अनुज लक्षमण के स्वागत हेतु सम्पूर्ण अयोध्या को दीप जलाकर रोशन किया था, तभी से दीपावली अर्थात दीपों का त्यौहार मनाया जाता है। यह त्योहार जीत का भी प्रतीक है। इस
पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान मां लक्ष्मी कमल पर विराजमान होकर प्रकट हुईं। उनके प्राकट्य से चारों ओर दिव्यता और खुशहाली का वातावरण छा गया। इसके बाद मां लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को अपने पति के रूप में स्वीकार किया। ऐसी मान्यता है कि माता लक्ष्मी जिस दिन प्रकट हुईं थी, उसी दिन को दीपावली मनाई जाने लगी।
दीपावली स्वच्छता व प्रकाश का भी पर्व है। कई दिन पहले ही बाजारों में रौनकें देखने को मिल जाती है, पूरा शहर जगमगाता हैं, कई तरह की दुकानें सजाई जाती है। बच्चे और बढ़े नए वस्त्र पहनते है। एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर मुँह मीठा करवाते है। रात के समय में खुब पटाखे चलाये जाते है। कई सप्ताह पूर्व ही दीपावली की तैयारियाँ आरंभ हो जाती हैं। लोग अपने घरों, दुकानों आदि की सफाई का कार्य आरंभ कर देते हैं। घरों में मरम्मत, रंग-रोगन, सफ़ेदी आदि का कार्य होने लगता है। लोग दुकानों को भी स्वच्छ कर सजाते हैं। इस दौरान लड़कियाँ और महिलाएँ रंगोली और अन्य रचनात्मक पैटर्न बनाती हैं।



