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धर्म: गणेश चतुर्थी आते ही हर तरफ गणपति बप्पा की भक्ति और उत्साह दिखाई देने लगता है। पूजा में मोदक, लाल फूल और सिंदूर के साथ एक चीज़ ऐसी है, जिसे गणपति जी को अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है- दूर्वा घास।


लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान गणेश को दूर्वा ही क्यों प्रिय मानी जाती है?
आखिर इस साधारण-सी दिखने वाली हरी घास में ऐसा क्या विशेष है?
धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ ज्योतिष में भी दूर्वा को विशेष ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। माना जाता है कि गणपति जी बुद्धि, विवेक और विघ्नों के निवारण के प्रतीक हैं, जबकि ज्योतिष में बुध ग्रह बुद्धि, वाणी, तर्क, गणना और निर्णय क्षमता का कारक माना जाता है। इसी कारण गणेश उपासना को बुध से जुड़ी सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ने की परंपरा मिलती है।


🌿 दूर्वा का हरा रंग भी अपने आप में एक ज्योतिषीय संकेत माना जाता है। हरा रंग बुध ग्रह से संबंधित माना जाता है। इसलिए गणेश जी को हरी दूर्वा अर्पित करना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि बुद्धि, विवेक और सकारात्मक सोच की कामना का प्रतीक भी माना जा सकता है।
🔱 दूर्वा की 21 गांठें क्यों?
गणेश पूजा में कई स्थानों पर 21 दूर्वा अर्पित करने की परंपरा है। इसके पीछे अलग-अलग धार्मिक मान्यताएँ और प्रतीकात्मक अर्थ बताए जाते हैं। 21 संख्या को गणपति उपासना में विशेष महत्व प्राप्त है और भक्त इसे श्रद्धा एवं संकल्प के साथ अर्पित करते हैं। मान्यता है कि गणपति जी को दूर्वा अर्पित करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने, बुद्धि को सकारात्मक दिशा देने और मन को स्थिर रखने की प्रार्थना की जाती है।
✨ इस गणेश चतुर्थी एक छोटा-सा संकल्प
जब आप गणपति जी को दूर्वा अर्पित करें, तो केवल अपनी इच्छाएँ न मांगें। साथ में यह भी प्रार्थना करें- “हे विघ्नहर्ता, मुझे सही निर्णय लेने की बुद्धि, सही मार्ग चुनने का विवेक और हर परिस्थिति में धैर्य प्रदान करें।” क्योंकि गणपति जी की आराधना का वास्तविक अर्थ केवल बाधाओं को हटाना नहीं, बल्कि उन बाधाओं का सामना करने के लिए बुद्धि और विवेक प्राप्त करना भी है।
🌺 गणपति बप्पा मोरया!
मंगल मूर्ति मोरया!
नोट: दूर्वा, बुध ग्रह और गणेश उपासना के संबंध को ज्योतिषीय/परंपरागत मान्यता के रूप में समझना चाहिए; यह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित ग्रह-उपचार नहीं है।
एस्ट्रोलॉजर ऋतिका मरवाहा , मोबाइल नंबर : 79868 11800



