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जालंधर इंजीनियरिंग इंडस्ट्रीज़ एसोसिएशन ने केंद्रीय बजट को लेकर वित्त मंत्री को भेजे महत्वपूर्ण सुझाव

by Doaba News Line

दोआबा न्यूज़लाइन

कहा -केंद्रीय बजट 2026 से पंजाब उद्योग को बड़ी उम्मीदें

जालंधर: जालंधर की इंजीनियरिंग इंडस्ट्रीज़ एसोसिएशन (रजि.) ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को केंद्रीय बजट 2026 के लिए अपने महत्वपूर्ण सुझाव ई-मेल के माध्यम से प्रेषित किए हैं। इन सुझावों पर एसोसिएशन की एक महत्वपूर्ण बैठक में विस्तार से विचार-विमर्श किया गया, जिसमें पंजाब को सीमावर्ती राज्य का विशेष दर्जा, औद्योगिक ढांचे को सुदृढ़ करने, एमएसएमई को राहत, निर्यातकों के संरक्षण तथा असंगठित श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा पर विशेष ज़ोर दिया गया।

एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील शर्मा ने कहा कि पंजाब, पाकिस्तान के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करने वाला राज्य है, जिसके कारण यहां उद्योगों को सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स, निवेश और बीमा लागत जैसी अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में पंजाब को जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर “बॉर्डर स्टेट स्टेटस” दिया जाना समय की आवश्यकता है।

₹1000 करोड़ के विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर पैकेज की मांग


 

एसोसिएशन ने केंद्रीय बजट 2026 में पंजाब के लिए ₹1000 करोड़ के विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर पैकेज की मांग की है ताकि औद्योगिक क्षेत्रों में सड़कें, बिजली आपूर्ति, लॉजिस्टिक्स, सुरक्षा व्यवस्था, ड्रेनेज एवं अन्य बुनियादी सुविधाएं सुदृढ़ की जा सकें। इससे न केवल निवेश बढ़ेगा बल्कि रोजगार सृजन को भी बल मिलेगा।

उलटे जीएसटी ढांचे से एमएसएमई को राहत की आवश्यकता

एसोसिएशन ने बताया कि वर्तमान में कच्चे माल पर अधिक तथा तैयार माल पर कम जीएसटी दर होने के कारण एमएसएमई की वर्किंग कैपिटल लंबे समय तक रिफंड में फंसी रहती है, जिससे नकदी संकट उत्पन्न होता है।

इस समस्या के समाधान हेतु निम्न मांगें रखी गईं:

इनवर्टेड जीएसटी स्ट्रक्चर को समाप्त किया जाए

तेज़, सरल एवं पूर्णतः स्वचालित आईटीसी रिफंड सिस्टम लागू किया जाए

अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित निर्यातकों के लिए विशेष सहायता पैकेज

एसोसिएशन ने बताया कि अमेरिका द्वारा लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ एवं व्यापारिक सख्ती के कारण, विशेषकर पंजाब के इंजीनियरिंग और एमएसएमई निर्यातक गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं।

सरकार से मांग की गई कि ऐसे निर्यातकों के लिए एक विशेष “निर्यात सहायता पैकेज” घोषित किया जाए, जिसमें एक्सपोर्ट इन्सेन्टिव्स, इंटरेस्ट सब्सिडी, लोजिस्टिक्स एवं शिपिंग कॉस्ट में राहत, वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच हेतु सरकारी सहयोग एवं मार्गदर्शन लाने की मांग शामिल हो।

डॉलर-रुपया विनिमय दर में स्थिरता लाने की मांग

डॉलर-रुपया विनिमय दर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव से उद्योगों की कच्चे माल की लागत, आयात-निर्यात अनुबंध और लाभप्रदता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। एसोसिएशन ने सुझाव दिया कि डॉलर विनिमय दर को स्थिर रखने हेतु एक नियंत्रित एवं संरक्षित तंत्र विकसित किया जाना चाहिए।

इस संदर्भ में उदाहरण देते हुए कहा गया कि यूएई (यूनाइटेड अरब एमिरेट्स) में अमेरिकी डॉलर की कीमत लंबे समय से स्थिर (1 यूएसडी = 3.6745 एइडी) रखी गई है, जहां मुद्रा के उतार-चढ़ाव का जोखिम सरकार स्वयं वहन करती है। ऐसी व्यवस्था से उद्योगों को दीर्घकालिक योजना, लागत नियंत्रण और निवेश निर्णयों में स्पष्टता मिलती है।

इसी प्रकार भारत में भी यदि नियंत्रित बैंड सिस्टम या हेजिंग सपोर्ट मैकेनिज्म लागू किया जाए, तो निर्यातक और आयातक दोनों को बड़ी राहत मिल सकती है।

सीएलएसएस योजना पुनः शुरू करने की अपील

एमएसएमई के तकनीकी उन्नयन, विस्तार एवं प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (सीएलएसएस) को पुनः शुरू करने की पुरज़ोर मांग की गई है।

स्मार्ट इंडस्ट्रियल एरिया इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की मांग

शहरी विकास योजनाओं की तर्ज पर औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भी स्मार्ट इंडस्ट्रियल एरिया इंफ्रास्ट्रक्चर फंड स्थापित करने की मांग रखी गई, ताकि पुराने एवं जर्जर औद्योगिक क्षेत्रों का आधुनिकीकरण किया जा सके।

ईएसआई से वंचित श्रमिकों को आयुष्मान भारत से जोड़ने की मांग

एसोसिएशन ने कहा कि एमएसएमई एवं छोटे उद्योगों में कार्यरत वे श्रमिक जो ईएसआई के दायरे में नहीं आते, उन्हें आयुष्मान भारत स्कीम के अंतर्गत स्वास्थ्य बीमा का लाभ दिया जाना चाहिए। इससे श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा तथा उद्योगों को स्थायित्व मिलेगा। इस अवसर पर आयोजित बैठक में सुनील शर्मा, प्रेजिडेंट, मनिंदर शर्मा, चेयरमैन, संदीप अग्रवाल, संदीप शारदा, जतिन वाधवा, अरुण शर्मा, अरुण शर्मा, राहुल बत्रा, गौतम शर्मा, चेतन शर्मा एवं अन्य सदस्यगण उपस्थित रहे।

अंत में सुनील शर्मा ने आशा व्यक्त की कि केंद्रीय बजट 2026 उद्योग-हितैषी, एमएसएमई-अनुकूल और समावेशी होगा तथा भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 

 

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