



दोआबा न्यूजलाइन (एस्ट्रोलॉजर ऋतिका मरवाहा)


रक्षाबंधन को हम भाई-बहन के प्रेम और विश्वास के पर्व के रूप में जानते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि राखी बाँधने की परंपरा का ज्योतिष से भी कोई संबंध हो सकता है?


भारतीय परंपरा में रक्षा-सूत्र को केवल एक धागा नहीं, बल्कि मंगलकामना, सुरक्षा और शुभ संकल्प का प्रतीक माना गया है। यही कारण है कि रक्षाबंधन के दिन राखी बाँधने से जुड़ी कई परंपराओं में शुभ समय, पूजा और मंत्रों को विशेष महत्व दिया जाता है।
पूर्णिमा और चंद्रमा का कनेक्शन


रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं और पारिवारिक संबंधों का कारक माना जाता है।
इसलिए पूर्णिमा के दिन मनाए जाने वाला यह पर्व भाई-बहन के भावनात्मक रिश्ते के लिए विशेष प्रतीकात्मक महत्व रखता है।
इसी वजह से रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बाँधते समय केवल रक्षा की ही नहीं, बल्कि उसके सुख, शांति, सफलता और दीर्घायु की कामना भी की जाती है।
कलाई पर ही क्यों बाँधी जाती है राखी? यह सवाल काफी दिलचस्प है।
भारतीय धार्मिक परंपराओं में कलाई पर रक्षा-सूत्र बाँधने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। इसे शुभ संकल्प और रक्षा की भावना से जोड़ा जाता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से शरीर के विभिन्न अंगों और ग्रहों के बीच प्रतीकात्मक संबंध बताए जाते हैं। इसलिए रक्षा-सूत्र को कलाई पर बाँधना केवल एक सामाजिक परंपरा नहीं, बल्कि शुभ ऊर्जा और संकल्प का प्रतीक भी माना जाता है।
राखी का रंग भी हो सकता है खास
अगर आप रक्षाबंधन में ज्योतिष का रंग जोड़ना चाहते हैं, तो राशि के अनुसार राखी के रंग को चुनना एक सुंदर परंपरा बन सकती है।
मेष और वृश्चिक के लिए लाल, वृषभ और तुला के लिए सफेद या गुलाबी, मिथुन और कन्या के लिए हरा, कर्क के लिए सफेद या सिल्वर,
सिंह के लिए सुनहरा या नारंगी, धनु और मीन के लिए पीला, जबकि मकर और कुंभ के लिए नीला रंग शुभ माना जाता है।
हालाँकि, ये रंग ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं, कोई वैज्ञानिक नियम नहीं।
राखी बाँधते समय मंत्र का महत्व
रक्षाबंधन पर पारंपरिक रूप से रक्षा-सूत्र बाँधते समय मंत्र का उच्चारण करने की परंपरा भी रही है।
“येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”
इस मंत्र में राजा बलि के रक्षा-सूत्र से जुड़ी धार्मिक कथा का स्मरण किया जाता है और रक्षा की मंगलकामना की जाती है।
इसलिए रक्षाबंधन पर राखी बाँधना केवल एक रस्म नहीं, बल्कि प्रेम + प्रार्थना + रक्षा के संकल्प का सुंदर संगम है।
रक्षाबंधन का सबसे बड़ा ज्योतिषीय संदेश
ज्योतिष हमें ग्रहों और नक्षत्रों के माध्यम से जीवन को समझने की परंपरा देता है, लेकिन रिश्तों की मजबूती केवल ग्रहों पर निर्भर नहीं होती।
रक्षाबंधन का असली संदेश है— जहाँ प्रेम सच्चा हो, वहाँ हर धागा रक्षा का वचन बन जाता है।
इसलिए इस रक्षाबंधन अपने भाई या बहन को केवल राखी और उपहार न दें, बल्कि एक ऐसा वादा दें जो किसी भी ग्रह-नक्षत्र से ज्यादा शक्तिशाली है—हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ देने का वादा।
क्योंकि आखिर में… “राखी कलाई पर बंधती है, लेकिन उसका रिश्ता सीधे दिल से जुड़ता है।”
“आप सभी को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ। “



