
दोआबा न्यूज़लाइन
जालंधर: शहर के संस्कृति के.एम.वी. स्कूल में बैसाखी का पावन पर्व बड़े ही उत्साह, श्रद्धा और सांस्कृतिक भव्यता के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत एक विशेष प्रातःकालीन सभा से हुई, जिसमें विद्यार्थियों ने बैसाखी के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को जानकारीपूर्ण भाषणों तथा “आई बैसाखी” जैसी कविताओं के माध्यम से प्रस्तुत किया। प्री-प्राइमरी विंग के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने पारंपरिक पंजाबी वेशभूषा और फुलकारी पहनकर रंगारंग भांगड़ा प्रस्तुत किया, जिससे पूरे वातावरण में उल्लास और उत्सव का माहौल बन गया।

वहीं विद्यालय की प्रधानाचार्या रचना मोंगा ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई और विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति की सराहना की। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “पंजाबी गांव” की अनूठी प्रस्तुति रही। विद्यार्थियों ने पारंपरिक दृश्यों- कुआं, पंचायत, बैलगाड़ी, पुराने समय की रसोई तथा पंजाब की पांच नदियों के प्रतीकात्मक मॉडल प्रस्तुत किए। इसके साथ ही मेले जैसे आकर्षण- फुलकारी कार्य, मेहंदी कलाकार, पारंपरिक बायोस्कोप, खिलौनों की दुकानें, हलवाई स्टॉल, गुब्बारे वाले तथा गांव के बस अड्डे का मॉडल भी प्रदर्शित किया गया।

कक्षा प्रथम से दसवीं तक के विद्यार्थियों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनमें कोलाज निर्माण, कविता पाठ, सुलेख, पोस्टर मेकिंग एवं कला गतिविधियां शामिल थीं। साथ ही, विद्यार्थियों को डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी के जीवन और उनके योगदान पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी दिखाई गई।
इस अवसर पर प्रधानाचार्या रचना मोंगा ने विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के प्रेरणादायक जीवन से सीख लेने पर बल दिया। उन्होंने बैसाखी के अवसर पर सभी पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व केवल फसल की खुशी का प्रतीक नहीं, बल्कि पंजाब की समृद्ध विरासत और सांस्कृतिक गौरव का भी प्रतीक है।
