दोआबा न्यूज़लाइन
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला और अनुच्छेद 142 का प्रयोग
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) में कथित गड़बड़ियों के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों और संगठन से जुड़ी 13 एफआईआर को रद्द करने की प्रक्रिया पर सुनवाई की। इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में एक विशेष अर्जी दाखिल की।
सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि वह संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए इन प्राथमिकियों (FIR) को निरस्त करे। यह कदम शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों को कानूनी मुकदमों से राहत देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
केंद्र सरकार का रुख और छात्रों को राहत
सॉलिसिटर जनरल ने शीर्ष अदालत को अवगत कराया कि केंद्र सरकार द्वारा 25 जुलाई को लिए गए निर्णय के अनुसार, दिल्ली पुलिस अब इन 13 मुकदमों को आगे नहीं बढ़ाना चाहती है। सरकार छात्रों के साथ हुए संवाद और किए गए वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। अधिकारियों का मानना है कि परीक्षा सुधारों को लेकर आवाज उठाने वाले सामान्य छात्रों और युवाओं के भविष्य पर इन मुकदमों का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए, इसलिए प्रशासनिक सहमति के आधार पर इन प्राथमिकियों को समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
2,873 संदिग्धों की भूमिका पर पुलिस का रुख
हालांकि आम प्रदर्शनकारियों पर से केस हटाए जा रहे हैं, लेकिन दिल्ली पुलिस ने अदालत के समक्ष एक महत्वपूर्ण तथ्य रखा। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के डेटाबेस के अनुसार, विरोध प्रदर्शन के दौरान लगभग 2,873 ऐसे व्यक्ति मौजूद थे जिनका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज है। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि वह केवल इन चिह्नित व्यक्तियों के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज कर जांच आगे बढ़ाना चाहती है। अदालत से यह भी अनुरोध किया गया कि इस फैसले को केवल इसी मामले की विशेष परिस्थितियों तक सीमित रखा जाए और इसे भविष्य के मामलों के लिए कानूनी मिसाल न माना जाए।
जांच का दायरा केवल हिंसा और संपत्ति नुकसान तक सीमित
सरकार और पुलिस प्रशासन ने अदालत में साफ किया कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले इन 2,873 व्यक्तियों के खिलाफ होने वाली जांच का दायरा बेहद सीमित और स्पष्ट होगा। जांच केवल उन्हीं मामलों तक सीमित रहेगी जहां किसी व्यक्ति को शारीरिक चोट पहुंचाई गई हो या सार्वजनिक व निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया हो। शांतिपूर्ण रूप से सभा में शामिल होने या केवल नारे लगाने के आधार पर किसी निर्दोष के खिलाफ कोई नई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
छात्र संगठन ने 5 सितंबर का दिल्ली मार्च वापस लिया
अदालत में हुई इस प्रगति और सरकार से मिले सकारात्मक आश्वासनों के बाद छात्र संगठन ने अपना अगला आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया है। संगठन के प्रवक्ताओं के अनुसार, 5 सितंबर को प्रस्तावित बड़े दिल्ली मार्च को रद्द कर दिया गया है। छात्र नेताओं ने कहा कि चूंकि केंद्र सरकार उनकी प्रमुख मांगों और मुकदमों को वापस लेने के वादे पर सकारात्मक कदम उठा रही है, इसलिए टकराव का रास्ता छोड़कर आपसी सहमति से समाधान की ओर बढ़ना ही उचित है।
आंदोलन की पृष्ठभूमि और झड़प की घटनाएं
यह पूरा विवाद 20 जून को जंतर-मंतर पर शुरू हुए छात्र आंदोलन से जुड़ा है। 20 जुलाई को संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प हो गई थी, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा था। इसके बाद यह विरोध देश के कई हिस्सों में फैल गया था। छात्रों की मांगों पर सरकार के साथ विस्तृत वार्ता के बाद 25 जुलाई को आंदोलन समाप्त हुआ था, और अब उसी समझौते के तहत मुकदमों को रद्द करने की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।