



दोआबा न्यूज़लाइन


जालंधर: शहर का एपीजे कॉलेज ऑफ़ फाइन आर्ट्स हर एक अवसर पर यह प्रयास करता है कि विद्यार्थियों को देश की समृद्ध धरोहर एवं अपनी विरासत से जोड़े रखें ताकि देश के प्रति उनका लगाव बने और देश के लिए सर्वस्व समर्पण करने की भावना का उनमें विकास हो सके। प्राचार्य डॉ नीरजा ढींगरा ने इस विषय में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हम 80वें स्वतंत्रता दिवस में प्रवेश कर रहे हैं और हमारी यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि हम अपनी युवा पीढ़ी को अपनी देश की परंपरा एवं विरासत की जानकारी इस तरह से पहुंचाएं, जोकि उनके दिल में घर कर जाए और वे अपने जिम्मेदार नागरिक के कर्तव्य का निर्वहन गंभीरता से कर सके।



इसी उद्देश्य के साथ कॉलेज के एनएसएस विंग ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में “एक भारत श्रेष्ठ भारत” थीम के अंतर्गत देश के 10 प्रदेशों पंजाब, तमिलनाडु, केरल, असम,राजस्थान, हिमाचल, कश्मीर, महाराष्ट्र, वेस्ट बंगाल, गुजरात प्रदेशों की संस्कृति, वेशभूषा, त्योहारों एवं खान-पान से विद्यार्थियों को रूबरू करवाने के लिए प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। तीन विद्यार्थियों से बनी टीम में एक मैंटर और दो मैंटीज़ शामिल हुए और उन्होंने जिस प्रदेश का प्रतिनिधित्व करना था वेशभूषा एवं गहने भी उसी प्रदेश के पहने। निर्णायक के रूप में उपस्थित डिजाइन विभाग के राजेश कलसी, अंग्रेजी विभाग से डॉ नवजोत दिओल एवं इतिहास विभाग से डॉ विश्वबंधु वर्मा ने विद्यार्थियों से उस प्रदेश से संबंधित, वहां के पर्यावरण संस्कृति, त्यौहार, लोगों के खान-पान संबंधित प्रश्नोत्तर किये गए, जिसका विद्यार्थियों ने बड़े उत्साह एवं जोश से उत्तर दिया और इसी प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर रही महाराष्ट्र की टीम इसके मेंटर थे दुर्विश खन्ना एवं मैटिज़ थे कृष्णा एवं लक्ष्मी, द्वितीय स्थान पर रही गुजरात एवं तमिलनाडु की टीम गुजरात की टीम के मेंटर थे साहिल एवं मैंटिस थे निहारिका एवं प्रथम, तमिलनाडु के मैंटर थे कनिका एवं मैंटिज़ थे नोनिका एवं विष्णु, तृतीय स्थान पर रही राजस्थान की टीम इसके मैंटर थे मन्नत कौछड़ एवं मैंटिज़ थे दिलप्रीत एवं निशांत। विजित विद्यार्थियों को प्राचार्य डॉ नीरजा ढींगरा, डॉ मोनिका आनंद और डॉ सिम्की देव ने स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
वहीं अंग्रेजी विभाग की प्राध्यापिका क्रिस्टीना ने इस अवसर पर भाषा की स्वतंत्रता विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हमें कोई भी बात अपने मुंह से निकालते हुए सौ बार सोचना चाहिए क्योंकि एक बार बात मुंह से निकल गई तो फिर उसको हम वापस नहीं ले सकते, भाषण की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि हम कुछ भी बोल सकते हैं हमें ऐसे शब्द मुंह से नहीं निकालने जो किसी दूसरे की संवेदनाओं को ठेस पहुंचाए। बीए प्रथम वर्ष की छात्रा लवीशा ने नृत्य की शानदार प्रस्तुति करते हुए माहौल को देश प्रेम के रंग से रंग दिया। मैडम चेतना एवं मैडम संजीवनी भल्ला ने श्रेष्ठ मंच संचालन करते हुए कार्यक्रम को चार चांद लगा दिए। डॉ ढींगरा ने कार्यक्रम के सफलतापूर्वक आयोजन के लिए एनएसएस विंग की डीन डॉ सिम्की देव एवं डीन फंक्शन डॉ मोनिका आनंद के प्रयासों की भरपूर सराहना की।





