Home जालंधर ब्रैस्ट कैंसर से जुड़े भ्रम और शर्तिया इलाज के दावों में क्या है सच्चाई? जानिए कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ रुपिंदर भार्गव से…

ब्रैस्ट कैंसर से जुड़े भ्रम और शर्तिया इलाज के दावों में क्या है सच्चाई? जानिए कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ रुपिंदर भार्गव से…

by Doaba News Line

जालंधर : ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) की समस्या आजकल लोगों में बहुत देखने को मिल रही है, अक्टूबर अवेर्नेस महीना भी चल रहा है, इसी विषय पर दोआबा न्यूज़लाईन की टीम ने कैंसर विशेषज्ञ डॉ रुपिंदर से बात की। जानकारी देते हुए डॉ रुपिंदर ने कहा कि ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) तब होता है, जब स्तन की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। इसके लक्षणों की अगर बात करें तो यह अलग-अलग हो सकते हैं, जैसे गांठ, त्वचा का मोटा होना या निपल्स से स्राव, गिल्टी होना। मरीज में समय के हिसाब में यह बढ़ता जाता है। आमतौर पर 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को प्रभावित करता है, लेकिन यह पुरुषों और कम उम्र की महिलाओं को भी प्रभावित कर सकता है।

ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) के मरीजों का ग्राफ कितना है?
25 साल के करियर में मैंने कैंसर के मरीज ही देखे है। रोजाना ही ब्रेस्ट कैंसर के केस सामने आते है। आमतौर पर स्तन कैंसर के 95 प्रतिशत मरीज जेनेटिक एलिमेंट के नहीं होते। इसीलिए यह भ्रम है कि सिर्फ जिसके पारिवारिक सदस्यों को यह बीमारी है, वहीं इसका शिकार होंगे। अगर किसी की पारिवारिक हिस्ट्री में कैंसर की बीमारी है तो एक बार मेमोग्राफी जरूर करवानी चाहिए।

आग डॉ रुपिंदर बताते है कि स्तन कैंसर के जोखिम को कम करने और इससे बचाव के तरीको में शरीर में मोटापा नहीं होने देना चाहिए। रोजाना व्यायाम करना चाहिए। अतिरिक्त शरीर की चर्बी और मोटापा स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं, क्योंकि वसा कोशिकाएं एस्ट्रोजन हार्मोन का उच्च स्तर संग्रहित करती हैं। वजन नियंत्रित रखने से इस जोखिम को कम किया जा सकता है। व्यायाम करना चाहिए।

ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों की अगर बात करें तो बदलता लाइफस्टाइल शरीर में मोटापा, खान- पान, पीरियड्स (मेन्ज़ीस) जल्दी शुरू हो जाते है। जो हार्मोन थेरेपी ज्यादा लेते है। उनमें भी यह बीमारी ज्यादा पाई जाते है।

ब्रेस्ट के बीच जो गिल्टी होती है उसकी जानकरी नही होती। शुरूआती दौर में यह गिल्टी दर्द नहीं करती है। लड़कियों को 20 साल की उम्र में स्व जांच करनी आनी चाहिए। जब अपने पीरियड्स आने बंद हो जाये उसके चार दिन बाद जब ब्रेस्ट सॉफ्ट हो जाए। तब चार उंगलियों के साथ पुरे ब्रेस्ट को एग्जामिन करना चाहिए। अच्छे तरिके के साथ बाजू और अंडरआर्म्स की जांच करनी चाहिए। आपको ब्रेस्ट के बीच कोई नया बदलाव या कोई गिल्टी बनी है, उसके बारे में पता चल जायेगा। सुई-कैची लगने से कैंसर फैलता नहींहै, ऑपेरशन करवाने से ही इस बीमारी से बचा जा सकता है।

कैंसर की कितनी स्टेज है?
केसर कितना फैला हुआ है, कैंसर के मुख्य रूप से 4 चरण (स्टेज 1 से स्टेज 4) होते हैं, लेकिन प्रारंभिक अवस्था को मिलाकर इसे 5 स्टेज (स्टेज 0 से स्टेज IV) में बांटा जाता है। स्टेज का अर्थ यह है कि मरीज को किस तरह का ईलाज देना है, 1 और 2 स्टेज में कैंसर को पूरे तरिके से खत्म किया जा सकता है। मरीज की स्टेज 4 में कैंसर पूरे तरिके से खत्म नहीं होता है, इस चरण के मरीज को हम दवाइयां देकर उसे कुछ समय के लिए बचा सकते है।

सोशल मीडिया पर कई अफवाहों में लोग शर्तिया इलाज के बड़े-बड़े दावे ठोकते है। ऐसी अफवाहों में मरीज को बिल्कुल भी नहीं आना चाहिए।
इन सभी बातों में आकर अपना डॉक्टरी ईलाज बंद न करवाएं। डॉ बहुत सालों की पढ़ाई और तजुर्बे के बाद हम मरीज का ईलाज कर पाते है।

 

 

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