दोआबा न्यूज़लाइन
कहा- इससे संक्रमण व बीमारियां फैलने की आशंका
जालंधर: दिन ब दिन बढ़ती गर्मी और आगामी बरसात के मौसम को देखते हुए हर उम्र के लोगों को स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। यह कहना जालंधर के टैगोर अस्पताल के चेयरमैन और माहिर डॉ. विजय महाजन का है। डॉ. महाजन ने लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि गर्मियों के मौसम में बाहर खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन न करें क्योंकि इससे कई प्रकार के संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग बाहर सड़क किनारे बिकने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं लेकिन इन खाद्य पदार्थों में ज्यादातर साफ़ सफाई का अभाव देखा जाता है, जो कि सीधे- सीधे गर्मी और बरसात के मौसम में बिमारियों को न्यौता देते हैं।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि दूषित भोजन और गंदा पानी फूड पॉइजनिंग, उल्टी-दस्त, टाइफाइड और पेट संबंधी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि खाने-पीने की वस्तुओं की गुणवत्ता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें तथा केवल साफ-सुथरी जगहों से ही खाने पीने की चीजें खरीदें।
डॉ. महाजन ने आगे कहा कि भीषण गर्मी के दौरान दोपहर के समय जरूरी होने पर ही बाहर निकलना चाहिए, क्योंकि अत्यधिक गर्मी शरीर पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। ज्यादा देर तक धूप में रहने से हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और कमजोरी जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। उन्होंने लोगों को सलाह दी है कि लोग गर्मी के मौसम में अधिक मात्रा में पानी पिएं, हल्के और सूती कपड़े पहनें तथा शरीर को ठंडा रखने वाले पेय पदार्थों का सेवन करते रहें।
उन्होंने आगे यह भी कहा कि 1 जुलाई से शुरू होने वाले बरसाती मौसम में संक्रमण का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। बारिश के दौरान मच्छरों और बैक्टीरिया का प्रकोप तेजी से फैलता है, जिससे डेंगू, मलेरिया, वायरल बुखार और त्वचा संबंधी रोगों के मामले बढ़ सकते हैं। उन्होंने हिदायत देते हुए कहा कि बरसात के मौसम में लोगों को घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए तथा साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि गर्मी और बरसात के मौसम में विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों की का खसा ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने पेरेंट्स से अपील की है कि इस मौसम में बच्चों को खुले में बिकने वाले कटे फल, स्ट्रीट फ़ूड और बासी भोजन से दूर रखें।