




दोआबा न्यूज़लाइन
जालंधर : पंजाब में सरकारी बसों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। पुरे राज्य में करीब पांच प्रतिशत सरकारी मुलाजिमों के सहारे ही कुछ बसें चल सकीं। इस दौरान बसों के बंद रहने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। क्योकि रोजाना लाखों की संख्या में यात्री सफर करते है। सबसे ज्यादा दिक्कत उन महिला यात्रियों को हुई, जो पीआरटीसी बसों में निशुल्क यात्रा करती हैं।




इस दौरान डिपो-2 के प्रधान सतपाल सिंह सत्ता, महासचिव रणजीत सिंह, हरजिंदर सिंह, डिपो-1 से चानण सिंह चनणा, बिक्रमजीत सिंह ने कहा कि हड़ताल के दौरान बस अड्डे व डिपोओं में रोष धरने दिए जा रहे है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा उनकी मांगों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही, जिसके चलते वह विरोध जताने को मजबूर हैं।
पंजाब में अब हड़ताल पर बैठे इस विभाग के कर्मचारी, अधिक जानकारी के लिए पढ़ें खबर…
जालंधर: पंजाब में एक बार फिर पंजाब रोडवेज, पनबस और PRTC के कॉन्ट्रैक्ट वर्कर अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए हैं। हड़ताल के चलते आज जालंधर में भी बसों का चक्का दिखा। इस दौरान बस अड्डों पर बसों का इंतजार करते यात्री परेशान होते हुए दिखाई दिए। जालंधर डिपो-1 और डिपो-2 के लगभग 300 कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल हैं, जिससे बसों की नियमित आवाजाही पर भरी असर दिखाई दिया।



इस दौरान कर्मचारियों का कहना है कि उनकी कच्चे कर्मचारियों को पक्के करने समेत अन्य 3 मुख्य मांगें हैं। इन मांगों को लेकर ही फिर एक बार कर्मचारियों द्वारा हड़ताल की जा रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक मांगों को लेकर सरकार द्वारा लिखित आदेश जारी नहीं करेगी, तब तक उनका यह धरना और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों की 3 मुख्य मांगे हैं। पहली मांग है कि कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का किया जाए। दूसरी मांग के तहत आउटसोर्सिंग पर काम कर रहे कर्मचारियों को कॉन्ट्रैक्ट पर लाया जाए। वहीं तीसरी प्रमुख मांग पिछले दिनों प्रदर्शनों के दौरान कर्मचारियों पर दर्ज पुलिस मामलों को तुरंत रद्द कर उन्हें बाइज्जत बरी किया जाए।
वहीं बसों के न मिलने से परेशान यात्रियों का कहना है कि हड़ताल के उन्हें कर्मचारियों की हड़ताल के बारे में पहले से पता नहीं था। वे रोजाना की तरह अपने काम के लिए बस स्टैंड पहुंचे थे, लेकिन समय पर बस न मिलने से उन्हें बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा है। सरकारी बसों में रोजाना सफर करने वाले लोगों के लिए यह स्थिति बेहद मुश्किल रही। बसों की कमी के चलते यात्रियों को वैकल्पिक साधनों से सफर करने के लिए भी मजबूर होना पड़ रहा है।



