
दोआबा न्यूज़लाइन
जालंधर: जालंधर का एनएचएस अस्पताल हजारों घुटनों की दिक्कतों के कारण परेशान लोगों की उम्मीद बना है। एनएचएस अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विभाग के माहिर डॉक्टरों की टीम द्वारा घुटना बदलने की सर्जरी के जरिए लाखों लोगों को दोबारा चलने-फिरने की ताकत मिली है और लंबे समय से चले आ रहे दर्द से राहत मिली है। लेकिन अभी भी इस सर्जरी को लेकर लोगों के मनों में कुछ गलत धारणाएं हैं। जिनकी वजह से लोग समय पर इलाज नहीं करवा पाते जो कि सरासर गलत है। आज के समय में जब इलाज में रोबोट तकनीक जैसी आधुनिक सुविधाएं आ चुकी हैं, तो सही और गलत बातों को समझना बहुत ज़रूरी हो गया है।
एन.एच.एस अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विभाग के सीनियर हड्डी रोग सर्जन डॉ. शुभांग अग्रवाल हैं जो कि घुटने, कूल्हे और कंधे के प्रत्यारोपण के लिए रोबोटिक सर्जरी के विशेषज्ञ हैं। डॉ. शुभांग अग्रवाल ने बताया कि एन.एच.एस अस्पताल के ऑर्थोपेडिक क्षेत्र में सबसे पहले रोबोट की मदद से घुटना बदलने की सर्जरी शुरू करने वाले केंद्रों में से एक है। उन्होंने बताया कि एन.एच.एस अस्पताल में ऑर्थोपेडिक विभाग यह लगातार प्रयास करता है कि मरीज का इलाज और ज्यादा सटीक हो, दर्द कम हो और मरीज जल्दी ठीक हो सके। अस्पताल में आधुनिक तकनीक और अनुभवी डॉक्टरों की मदद से अब घुटने का ऑपरेशन पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और सफल बन चुका है।

इस सम्बन्ध में आगे जानकारी देते हुए डॉ.अग्रवाल ने बताया कि आधुनिक तकनीकों के आने के बाद आज भी घुटना बदलने की सर्जरी को लेकर लोगों के मनों में कुछ गलत धारणाएं हैं जिनकी असल सचाई हम आपको बताएंगे।
पहली गलत धारणा: घुटना बदलने की सर्जरी सिर्फ बुज़ुर्गों के लिए होती है

डॉ. अग्रवाल का कहना है कि यह बात बिलकुल गलत है। उनके अनुसार इलाज उम्र देखकर नहीं किया जाता, बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि घुटने की हालत कितनी खराब है और वह रोज़मर्रा की ज़िंदगी को कितना प्रभावित कर रहा है। अगर दर्द बहुत ज्यादा है और चलना-फिरना मुश्किल हो गया है, तो कम उम्र के लोगों को भी सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
वहीं जिन मरीजों को जोड़ ज्यादा घिस चुका हो, पुरानी चोट हो या घुटने में टेढ़ापन हो, उन्हें भी घुटना बदलने से बहुत फायदा मिल सकता है। उन्होंने बताया कि आज की रोबोट तकनीक से हर मरीज के घुटने के अनुसार सही तरीके से नया जोड़ लगाया जाता है, जिससे इलाज ज्यादा सटीक और सफल होता है।
दूसरी धारणा: घुटना बदलने की सर्जरी बहुत दर्दनाक होती है और ठीक होने में बहुत ज्यादा समय लगता है
डॉ. शुभांग अग्रवाल ने इस धरना को भी गलत बताते हुए कहा कि आज रोबोट की मदद से होने वाली सर्जरी पहले से कहीं ज्यादा आसान और आरामदायक है। इसमें शरीर को कम नुकसान पहुंचता है, जिससे ऑपरेशन के बाद दर्द भी कम होता है और मरीज जल्दी ठीक होने लगता है। कई लोग 24 घंटे के भीतर चलना शुरू कर देते हैं और कुछ ही समय में अपने रोज़मर्रा के काम करने लगते हैं।
तीसरी धारणा: रोबोट से की जाने वाली घुटना सर्जरी खतरनाक होती है
उन्होंने कहा कि यह बिलकुल गलत है जबकि रोबोट तकनीक इलाज को और ज्यादा सुरक्षित और सटीक बनाती है। रोबोट अपने आप काम नहीं करता, बल्कि पूरा नियंत्रण सर्जन के हाथ में होता है।
एन.एच.एस अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विभाग में आधुनिक तकनीक से घुटने की बिल्कुल सही माप लेकर जोड़ लगाया जाता है, जिससे फिटिंग बेहतर होती है और लंबे समय तक अच्छा परिणाम मिलता है। यह केंद्र एन.एच.एस अस्पताल का हिस्सा है, जहां उन्नत तकनीक और अनुभवी डॉक्टर मिलकर मरीजों का इलाज करते हैं। आज रोबोट तकनीक की वजह से घुटना बदलने की सर्जरी पहले से ज्यादा सुरक्षित, कम दर्द वाली और जल्दी ठीक होने वाली बन चुकी है।
चौथी गलत धारणा: घुटने में लगाए जाने वाले नए जोड़ ज्यादा समय तक नहीं चलते
डॉ. अग्रवाल ने इस धरना को भी सिरे से नकारते हुए कहा कि आजकल लगाए जाने वाले आधुनिक जोड़ 25 से 30 साल या उससे भी ज्यादा समय तक अच्छे से काम कर सकते हैं। रोबोट तकनीक से जोड़ बिल्कुल सही जगह पर लगाया जाता है, जिससे वजन बराबर पड़ता है और घिसने की संभावना कम हो जाती है। इससे जोड़ की उम्र और भी बढ़ जाती है -यहां तक कि कम उम्र के मरीजों में भी।
पांचवीं गलत धारणा: सर्जरी के बाद चलना-फिरना सीमित हो जाता है
यह धरना भी डॉ अग्रवाल के अनुसार सरासर गलत है। उनके अनुसार उनके ज़्यादातर मरीज सर्जरी के बाद बहुत अच्छी तरह से चल-फिर पाते हैं। ठीक होने के बाद लोग आराम से चल सकते हैं, सीढ़ियां चढ़ सकते हैं, साइकिल चला सकते हैं और रोज़ के काम पहले से भी बेहतर तरीके से कर पाते हैं। सही फिजियोथेरेपी और व्यायाम इसमें बहुत मदद करते हैं। आज सही तकनीक और सही इलाज से घुटना बदलने की सर्जरी लोगों को दर्द से आज़ादी और फिर से सक्रिय जीवन देने में सफल हो रही है।
छेवीं गलत धारणा: रोबोट तकनीक से इलाज में कोई खास फर्क नहीं पड़ता
उनका कहना है कि रोबोट तकनीक इलाज को बहुत बेहतर बनाती है। इससे हर मरीज के घुटने की सही माप ली जाती है, हड्डी को बिल्कुल सटीक तरीके से काटा जाता है और जोड़ का संतुलन सही रखा जाता है। यह सब हाथ से किए जाने वाले ऑपरेशन से कहीं ज्यादा सही और सुरक्षित होता है।
अंत में उन्होंने घुटनों की समस्या से परेशान लोगों को सन्देश दिया कि घुटना बदलने की सर्जरी सही जानकारी और आधुनिक तकनीक के साथ आपका जीवन बदल सकती है। क्योंकि आज रोबोट तकनीक की मदद से इलाज ज्यादा सुरक्षित, ज्यादा सटीक और जल्दी ठीक होने वाला हो गया है। जब लोग गलत धारणाओं को छोड़कर सच्चाई समझते हैं, तो वे बिना डर के इलाज का सही फैसला ले पाते हैं और फिर से दर्द-मुक्त, सक्रिय जीवन जी सकते हैं।
