दोआबा न्यूजलाइन
फगवाड़ा/जालंधर: फगवाड़ा की जीएनए यूनिवर्सिटी ने पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम 2024-25 के तहत पुरस्कार वितरण समारोह एवं परियोजना समापन रिपोर्ट का आयोजन किया। इस कार्यक्रम को पंजाब राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समर्थित किया गया।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत विश्वविद्यालय ने 08 गतिविधियों का आयोजन किया, जिसमें चंडीगढ़ का ईको-टूर, पोस्टर मेकिंग, पर्यावरण क्विज़
बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट, 3 दिन और 2 रातों का कैंपेन “हेल हिमालया, शिमला” रहा।
इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय ने लुधियाना, जालंधर, नवांशहर, कपूरथला और होशियारपुर के 05 विभिन्न जिलों के स्कूलों में वर्टिकल गार्डन स्थापित किए। इन स्कूलों में छात्रों ने 260 से अधिक पौधों को बेकार प्लास्टिक की बोतलों में रचनात्मक रूप से लगाया, जो स्कूल ऑफ नेचुरल साइंसेज़ के संकाय सदस्यों के मार्गदर्शन में किया गया।
इस अवसर पर छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में ईको ब्रिक वॉल भी बनाई, जिसमें बेकार प्लास्टिक की बोतलों को रैपर और अन्य कचरे से भरकर दीवार के रूप में स्थापित किया गया। इन गतिविधियों से छात्रों में पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति जागरूकता बढ़ी और उन्हें यह समझने का मौका मिला कि पर्यावरण को कैसे बचाया जा सकता है।
परियोजना समापन रिपोर्ट डॉ. योगेश भल्ला (पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम के समन्वयक) द्वारा प्रस्तुत की गई। सभी प्रतियोगिताओं और गतिविधियों के विजेताओं को माननीय चांसलर मैम, जसलीन कौर, डॉ. हेमंत शर्मा (वाइस चांसलर), डॉ. मोनिका हंसपाल (डीन अकादमिक्स) और अन्य डीन व विभागाध्यक्षों द्वारा पुरस्कृत किया गया। इस दौरान चांसलर सरदार गुरदीप सिंह सीहरा ने कार्यक्रम में शामिल सभी छात्रों और शिक्षकों को बधाई दी और कहा कि छात्र जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे अन्य लोग भी प्रेरित होते हैं और पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आते हैं।
इस अवसर पर चांसलर मैम जसलीन कौर ने कहा, “पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए GNA विश्वविद्यालय ने एक व्यापक पर्यावरण शिक्षा पहल शुरू की है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों, शिक्षकों और समाज को पर्यावरणीय संसाधनों की रक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल से सशक्त बनाना है।”
वहीं वाइस चांसलर डॉ. हेमंत शर्मा ने कहा कि पर्यावरण शिक्षा, एक पर्यावरण-सचेत समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस पहल के माध्यम से इंटरैक्टिव कार्यशालाओं, जागरूकता अभियानों और व्यावहारिक गतिविधियों के द्वारा जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण, कचरा प्रबंधन और सतत जीवनशैली जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रकाश डाला जाएगा।” डीन अकादमिक्स डॉ. मोनिका हंसपाल ने जोर देते हुए कहा कि शिक्षा ही बदलाव की प्रेरणा है। जब हम पर्यावरण जागरूकता को पाठ्यक्रम और सामुदायिक कार्यक्रमों में शामिल करते हैं, तो हम व्यक्तियों को सही निर्णय लेने और अपने ग्रह को संरक्षित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने के लिए सशक्त बनाते हैं।”