दोआबा न्यूज़लाइन
SC कमीशन ने बिट्टू को 4 प्रमुख धार्मिक एवं सामाजिक स्थलों पर जाकर नतमस्तक होने को कहा
चंडीगढ़: केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू पुलिस पर जातिसूचक टिप्पणी मामले में आज बुधवार को चंडीगढ़ में पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के समक्ष पेश हुए। इस दौरान उन्होंने पंजाब SC आयोग के सामने वकीलों के जरिए अपना पक्ष रखा। वहीं बिट्टू का पक्ष सुनने के बाद SC आयोग ने राजयमंत्री को 4 प्रमुख धार्मिक एवं सामाजिक स्थलों पर जाकर नतमस्तक होने को कहा। यह कार्रवाई SC आयोग ने बिट्टू द्वारा पुलिस पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में की है। आयोग ने बिट्टू को कहा कि वह श्री हरि मंदिर साहिब अमृतसर, डेरा बल्लां जालंधर, राम तीर्थ स्थल, अमृतसर और डॉ. भीमराव अंबेडकर से जुड़े फिल्लौर स्थित स्मारक पर जाकर श्रद्धा प्रकट करें।
जानकारी के अनुसार अपना पक्ष रखते हुए SC आयोग के सामने रवनीत बिट्टू ने कबूल किया कि घटना के दौरान उनके मुंह से निकले कुछ शब्द कानूनी दृष्टि से गलत थे। उन्होंने कहा कि इस मामले में वह पहले ही सार्वजनिक तोर पर माफी मांग चुके हैं।
सुनवाई के दौरान रवनीत सिंह बिट्टू ने आयोग को बताया कि जिस दिन यह विवाद हुआ उस समय परिस्थितियां बेहद तनावपूर्ण थीं। उन्होंने यह भी कहा कि उक्त विवादित वीडियो अपने इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म्स से हटा दी थी। बिट्टू के मुताबिक उन्हें सबसे पहले संगरूर में एक पुलिस अधिकारी ने रोका और बताया कि भाजपा नेता ओंकार सिंह को हिरासत में लिया गया है।
बिट्टू ने कहा कि इसके बाद वह संबंधित थाने पहुंचे, लेकिन वहां कहा गया कि ओंकार सिंह को दूसरे स्थान पर ले जाया गया है। बिट्टू ने आरोप लगाया कि इस दौरान उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया, जिससे वह मानसिक रूप से आहत हुए। बाद में जब वह धूरी पहुंचे तो वहां भी पुलिस अधिकारियों के साथ उनकी तीखी बहस हुई और तनावपूर्ण माहौल बन गया।
वहीं उन्होंने आयोग के समक्ष दोहराया कि यदि उनके मुंह से कोई आपत्तिजनक शब्द निकला है तो उसके लिए वह खेद व्यक्त करते हैं। बिट्टू ने कहा कि वह ऐसी राजनीतिक विचारधारा से आते हैं, जहां समाज के हर वर्ग के सम्मान पर जोर दिया जाता है।
बताते चलें कि 26 मई 2026 को निकाय चुनाव के मतदान के दौरान यह विवाद शुरू हुआ था जब धूरी में भाजपा नेता ओंकार सिंह को हिरासत में लिए जाने के बाद रवनीत सिंह बिट्टू और पुलिस अधिकारियों के बीच हुई बहस का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो गया था। इसके बाद उन पर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक और जातिसूचक शब्दों के प्रयोग के आरोप लगे थे।