महिला आरक्षण पर बड़ा मोड़, देश की संसद एक ऐतिहासिक फैसला लेने के करीब: PM मोदी

दोआबा न्यूज़लाइन

नई दिल्ली: देश में महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संकेत दिया है कि भारत जल्द ही इस दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय लेने के करीब है। उन्होंने इसे 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में से एक बताते हुए कहा कि इससे देश की राजनीति और शासन व्यवस्था में व्यापक बदलाव आएगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संसद के आगामी विशेष सत्र में इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने भरोसा जताया कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में यह कदम देश के लोकतांत्रिक ढांचे को और मजबूत करेगा। सरकार ने संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र 16 अप्रैल से बुलाया है, जिसमें महिला आरक्षण विधेयक प्रमुख एजेंडे में शामिल हो सकता है। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं और सभी की नजर इस सत्र पर टिकी हुई है।

विपक्ष का पलटवार

वहीं, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा उठाने के पीछे असल मकसद परिसीमन (Delimitation) है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस अहम मुद्दे को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल कर रही है। सोनिया गांधी ने आगे यह भी कहा कि परिसीमन का प्रस्ताव देश के संघीय ढांचे के लिए संवेदनशील विषय है और इसे राजनीतिक लाभ के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार संसद में इस मुद्दे को जल्दबाजी में आगे बढ़ाना चाहती है।

क्या है महिला आरक्षण विधेयक

महिला आरक्षण विधेयक के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। हालांकि, इसे लागू करने के लिए परिसीमन और जनगणना जैसी प्रक्रियाएं पूरी होना जरूरी मानी जा रही हैं।

2029 चुनाव से पहले लागू करने की चर्चा

सरकार की मंशा इस कानून को 2029 के आम चुनाव से पहले लागू करने की बताई जा रही है। ऐसे में आने वाला विशेष सत्र इस दिशा में निर्णायक साबित हो सकता है

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