Breaking: पंजाब के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री संजीव अरोड़ा की बड़ी मुश्किलें, 2 दिन का बढ़ा रिमांड

दोआबा न्यूज़लाइन

लुधियाना: पंजाब के आम आदमी पार्टी के मंत्री संजीव अरोड़ा की मुश्किलें दिन ब दिन कम होने की बजाए बढ़ती ही जा रही हैं। ताजा जानकारी के अनुसार गुरुग्राम की विशेष पीएमएलए (PMLA) कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संजीव अरोड़ा की ED की रिमांड 2 दिन और बढ़ा दी है। बता दें कि आज शनिवार को संजीव अरोड़ा की कोर्ट में मनी लॉन्ड्रिंग और ₹100 करोड़ से अधिक के फर्जी जीएसटी (GST) घोटाला मामले में पेशी थी।

जानकारी के अनुसार पेशी के दौरान पीएमएलए (PMLA) कोर्ट ने पूछताछ के लिए उन्हें रिमांड पर रखने का आदेश दिया है। रिमांड अवधि समाप्त होने पर केंद्रीय जांच एजेंसी ने (ED) उनके वित्तीय लेन-देन, फर्जी इनवॉइस और शेल कंपनियों के नेटवर्क को खंगालने तथा कुछ नए सबूतों के सामने आने का हवाला देकर और दिनों की कस्टडी मांगी थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

बता दें कि ED ने 9 मई को संजीव अरोड़ा के चंडीगढ़ स्थित उनके सरकारी आवास पर दिनभर छापेमारी करने के बाद देर शाम उन्हें गिरफ्तार किया था। जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें 7 दिनों की शुरुआती ईडी कस्टडी में भेजा था और आज वह कस्टडी समाप्त हो गई थी।

कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, ED द्वारा गिरफ़्तारी मामले में आज थी सुनवाई

पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा की मुश्किलें दिन ब दिन बढ़ती चली जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार संजीव अरोड़ा की आज फिर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में पेशी थी जहां से आज भी उन्हें राहत नहीं मिली है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा अरेस्ट किए मंत्री अरोड़ा द्वारा दायर याचिका पर आज फिर हाईकोर्ट में करीब पौने घंटे तक सुनवाई चली, लेकिन अरोड़ा को आज भी राहत नहीं मिल पायी।

बताया जा रहा है कि पेशी के दौरान अरोड़ा के वकील ने दलील दी कि इस केस में शिकायतकर्ता अफसर और गिरफ्तार करने वाला अधिकारी एक ही व्यक्ति है, जोकि पीएमएलए की धारा 19 के तहत कानून के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि शिकायत दर्ज करने वाला और गिरफ्तारी करने वाला अधिकारी एक ही नहीं हो सकता।

वहीं सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आप हमें विवादित आदेश की तरफ ले जाइए, आप किस बात का संदर्भ दे रहे हैं?” इसके जवाब में अरोड़ा के वकील ने कहा कि गिरफ्तारी मेमो मनगढ़ंत था। सुबह 7 बजे गिरफ्तार किया गया और रात 11:20 बजे अदालत में पेश किया गया। अगर गिरफ्तारी शाम 4 बजे हुई थी, तो कार्यावधि के दौरान पेश किया जा सकता था। रात 11:20 बजे जज को जगाने की क्या जरूरत थी?” गिरफ्तारी के आधार गिरफ्तारी के समय ही दिए जाने चाहिए थे। गिरफ्तारी के आधार पहले से टाइप किए हुए और सुनियोजित थे।

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