केंद्र सरकार के 4 श्रम कोड के विरोध में मजदूरों के हक में आई कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सिस्ट स्टेट कमेटी

दोआबा न्यूज़लाइन

पंजाब सरकार मोदी सरकार के बनाए चार लेबर कोड में बदलाव करे, जो मज़दूरों को गुलाम बनाते हैं: सुखविंदरसेखों

जालंधर : जालंधर के पंजाब प्रेस क्लब में आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सिस्ट स्टेट कमेटी ने केंद्र सरकार द्वारा बनाए 4 श्रम कोड को मजदूरों का विरोधी बताया। इस वार्ता में कॉमरेड सुखविंदर सिंह सेखों ने इन नए श्रम कानूनों को “मजदूर विरोधी” और “पूंजीपतियों के हितैषी” करार दिया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार 29 लेबर कानूनों को खत्म करके और चार लेबर कोड लागू करके कॉर्पोरेट घरानों को मज़दूर वर्ग को सीधा लूटने का लाइसेंस दे रही है।

इस वार्ता के दौरान सुखविंदर सिंह सेखों ने पंजाब सरकार से अपील करते हुए कहा कि राज्य सरकार को केंद्र और NDA सरकार की विपक्ष होने के नाते इन 4 श्रम कानूनों को राज्य में लागू करने का विरोध करना चाहिए। कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सिस्ट स्टेट कमेटी की मांग है कि पंजाब सरकार संवैधानिक नियमों को बनाए रखते हुए केंद्र की मोदी सरकार द्वारा बनाए गए मज़दूर-विरोधी कोड की जगह मज़दूरों के हितों वाले संशोधन लाने के लिए मज़दूरों के प्रतिनिधियों और कानूनी जानकारों की एक कमेटी बनाए। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार इन कानूनों का विरोध कर एक मिसाल कायम करे कि पंजाब सरकार मजदूरों के हक की सरकार है और वह मजदूरों के साथ शोषण बर्दाश्त नहीं करेगी।

वहीं इसके साथ ही सेखों ने यह भी कहा कि अगर पंजाब सरकार मजदूरों के हक में खड़ी होती है तो ठीक है अगर नहीं तो फिर मजदूर खुद संघर्ष के लिए तैयार हैं और कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सिस्ट स्टेट कमेटी उनके इस संघर्ष के में उनके हमेशा साथ है। आने वाले दिनों में यह संघर्ष और तेज होगा। उन्होंने आगे कहा कि इन मजदूर विरोधी कानूनों के विरोध में देशव्यापी और पंजाब व्यापी संघर्ष किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि चार लेबर कोड लागू होने पर मालिक मज़दूरों को “फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉयमेंट” देंगे। यह फिक्स्ड-टर्म मालिकों के कॉन्ट्रैक्ट में शामिल किया गया है। अगर मज़दूरों को नौकरी से निकाल दिया जाता है तो वे किसी भी कानून का सहारा नहीं ले सकेंगे। इसके साथ ही यूनियन बनाने की प्रक्रिया को भी मुश्किल बना दिया गया है। पहले सात मज़दूर मिलकर यूनियन रजिस्टर करवा सकते थे। अब इसमें कुल वर्कर्स की संख्या का 10 परसेंट या कम से कम 100 होनी चाहिए। कहने का मतलब है कि ‘न तेल होगा, न राधा नाचेगी।’ यानी यूनियन बनाना मुश्किल कर दिया गया है। लेबर कानून पहले बिजली से चलने वाली मशीनों पर काम करने वाले 10 वर्कर्स और बिना बिजली के काम करने वाले 20 वर्कर्स पर लागू होते थे। अब यह संख्या बढ़ाकर क्रम से 20 और 40 कर दी गई है। पहले मालिकों को 100 वर्कर्स तक वाली फैक्ट्री बंद करने के लिए लेबर डिपार्टमेंट से परमिशन लेनी पड़ती थी, अब यह संख्या 300 कर दी गई है। यानी, 84 प्रतिशत मज़दूरों को लेबर कैंडीज़ के ज़रिए कानूनी सुविधाओं से वंचित रखा गया है। जबकि पंजाब में 80 प्रतिशत मज़दूर तो पेश भी नहीं होते और उन्हें कोई कानूनी अधिकार भी नहीं मिलता।

उन्होंने यह भी कहा है कि केंद्र की मोदी सरकार ने “कारोबार में आसानी” के नाम पर देसी-विदेशी कॉर्पोरेट्स घरानों के दबाव में राज्य सरकारों को लेबर कोड लागू करने के निर्देश दिए हैं।

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