पंजाब में यूरिया घोटाले का आरोप, भाजपा ने की सीबीआई जांच की मांग

किसानों के लिए भेजी गई रियायती खाद की कथित हेराफेरी पर भाजपा का हमला, सरकार पर संरक्षण देने के आरोप

ढिल्लों ने कहा कि किसानों को सस्ती दरों पर खाद उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार भारी सब्सिडी दे रही है। उनके अनुसार, 45 किलो यूरिया का एक बैग, जिसकी बाजार कीमत लगभग 2,800 रुपये है, किसानों को मात्र 266 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके बावजूद किसानों के लिए निर्धारित रियायती खाद के सरकारी संयंत्रों और कारखानों तक पहुंचने की खबरें बेहद चिंताजनक हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि मार्कफेड और मिल्कफेड जैसे सरकारी संस्थानों तक हजारों बोरी रियायती यूरिया का पहुंचना बिना उच्च स्तरीय सरकारी मिलीभगत के संभव नहीं है। ढिल्लों ने कहा कि कई मामलों में खाद की बोरियां बिना उचित दस्तावेजों और बैच नंबरों के सरकारी इकाइयों तक पहुंचीं, जिससे पूरे प्रकरण पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

भाजपा नेता ने कहा कि उन्होंने पहले भी केंद्र सरकार के समक्ष पंजाब में यूरिया और डीएपी खाद की कमी का मुद्दा उठाया था। इसके बाद केंद्र ने किसानों की जरूरतों के अनुरूप पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई। बावजूद इसके यदि किसानों के हिस्से की खाद की कथित हेराफेरी हुई है तो इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार पर तय होनी चाहिए।

ढिल्लों ने कहा कि केवल निजी कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज कर देना पर्याप्त नहीं होगा। इस पूरे मामले में शामिल सभी अधिकारियों, संबंधित संस्थाओं और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि मामले की सीबीआई जांच करवाई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित हो।

उन्होंने कहा कि किसानों के हितों से जुड़े ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और दोषियों को कानून के अनुसार सख्त सजा मिलनी चाहिए।

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