देश में स्वाइन फ्लू का बढ़ता खतरा: पैनिक न करें, लेकिन सतर्कता बेहद जरूरी: डॉ. पारस वर्मा

दोआबा न्यूज़लाइन

जालंधर: देश के कई राज्यों में मौसम के मिजाज और लगातार हो रही बारिश के बीच इन्फ्लूएंजा-ए (H1N1), जिसे आम बोलचाल में स्वाइन फ्लू कहा जाता है, के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। अकेले राजधानी दिल्ली में संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 3,200 के पार पहुंच चुका है, जबकि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से भी लगातार नए मामले सामने आ रहे हैं। इस बदलते स्वास्थ्य परिदृश्य और बढ़ते संक्रमण को देखते हुए जालंधर के पटेल अस्पताल के चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. पारस वर्मा ने जनता के लिए एक विशेष मेडिकल एडवाइजरी और विस्तृत गाइडलाइंस साझा की हैं।

वायरस वही, लेकिन सावधानी नई: डॉ. पारस वर्मा

डॉ. पारस वर्मा के अनुसार, “इस समय देश में स्वाइन फ्लू के मामलों में जो उछाल देखा जा रहा है, वह किसी नए वेरिएंट या म्यूटेशन की वजह से नहीं है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) की रिपोर्ट भी इस बात की पुष्टि करती है कि देश में पुराना ‘H1N1 pdm09’ स्ट्रेन ही सक्रिय है। दरअसल, बदलते मौसम, हवा में उच्च आद्रता (Humid Weather) और कम्यूनिटी इम्यूनिटी में समय के साथ आई कमी के कारण यह वायरस इतनी तेजी से पैर पसार रहा है। इसलिए घबराने (Panic) के बजाय सही जानकारी और सावधानी से इस पर नियंत्रण पाया जा सकता है।”

लक्षणों को पहचानें: बिना बुखार के भी हो सकता है स्वाइन फ्लू

डॉ. वर्मा ने स्पष्ट किया कि स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य मौसमी सर्दी-जुकाम जैसे ही दिखते हैं, जिससे लोग अक्सर भ्रमित हो जाते हैं। मुख्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • चानक तेज बुखार आना या कंपकंपी लगना।
  • गले में गंभीर खराश, दर्द और लगातार सूखी खांसी।
  • अत्यधिक शारीरिक थकान, सिरदर्द और मांसपेशियों में जकड़न।
  • नाक बहना, आंखों में जलन या सांस लेने में भारीपन।

डॉ. पारस वर्मा की विशेष सलाह: “मरीजों को यह समझना होगा कि हर बार स्वाइन फ्लू में तेज बुखार होना अनिवार्य नहीं है। कई मामलों में मरीज को बिना बुखार के भी केवल सूखी खांसी, बदन दर्द और कमजोरी की शिकायत हो सकती है। ऐसे में लक्षणों को हल्के में न लें और तुरंत जांच करवाएं।”

इन मरीजों के लिए खतरा अधिक (High-Risk Groups)
डॉ. वर्मा ने चेतावनी देते हुए कहा कि कुछ विशेष श्रेणी के लोगों को इस संक्रमण से बहुत अधिक सावधान रहने की आवश्यकता है:

1 बुजुर्ग और बच्चे: 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग और 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।
2 गर्भवती महिलाएं: गर्भावस्था के दौरान शरीर में होने वाले बदलावों के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
3 गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग: जिन्हें पहले से मधुमेह (Diabetes), अनियंत्रित उच्च रक्तचाप (Hypertension), किडनी की बीमारी या अस्थमा/सीओपीडी जैसी सांस की तकलीफें हैं।

डॉ. पारस वर्मा द्वारा सुझाए गए बचाव के अचूक उपाय:-
संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए डॉ. वर्मा ने निम्नलिखित कड़े दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है:

  • मास्क का नियमित उपयोग: भीड़भाड़ वाले स्थानों, सार्वजनिक वाहनों और अस्पतालों में जाते समय थ्री-लेयर या N95 मास्क का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।
  • हाथों की स्वच्छता (Hand Hygiene): किसी भी बाहरी वस्तु को छूने के बाद हाथों को कम से कम 20 सेकंड तक साबुन और पानी से धोएं या अच्छे सैनिटाइज़र का प्रयोग करें। बिना हाथ धोए आंख, नाक और मुंह को छूने से पूरी तरह बचें।
  • सोशल डिस्टेंसिंग और आइसोलेशन: यदि घर में किसी भी सदस्य को फ्लू या सर्दी के लक्षण दिख रहे हैं, तो उन्हें तुरंत एक अलग और हवादार कमरे में आइसोलेट करें ताकि परिवार के अन्य सदस्य सुरक्षित रहें।
  • हाइड्रेटेड रहें: शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने के लिए गुनगुना पानी, सूप और विटामिन-सी युक्त तरल पदार्थों का भरपूर सेवन करें।

‘सेल्फ-मेडिकेशन’ (खुद से दवा लेना) हो सकता है जानलेवा
लेख के अंत में डॉ. पारस वर्मा ने एक बेहद महत्वपूर्ण चेतावनी देते हुए कहा, “अक्सर लोग डॉक्टर की सलाह के बिना मेडिकल स्टोर से सीधे एंटीबायोटिक्स या एंटीवायरल दवाएं (जैसे ओसेल्टामिविर/टैमीफ्लू) खरीदकर खाना शुरू कर देते हैं। यह बेहद खतरनाक अभ्यास है। गलत दवा लेने से शरीर में ड्रग-रेसिस्टेंस (दवाओं का बेअसर होना) बढ़ सकता है। यदि आपको सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई हो रही हो, सीने में दर्द हो, या 3 दिन से ज्यादा बुखार न उतरे, तो तुरंत नजदीकी अधिकृत स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर योग्य चिकित्सक से ही परामर्श लें।”

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