मजदूर दिवस पर विशेष सत्र में CL कर्मचारियों का DA व बकाया जारी करने की घोषणा करे सरकार: सुनील जाखड़

दोआबा न्यूज़लाइन

BJP प्रदेशाध्यक्ष बोले- सिर्फ राजनीतिक बचाव नहीं, कर्मचारियों व मजदूरों को मिले वास्तविक राहत

चंडीगढ़ : पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को घेरते हुए कहा है कि यदि 1 मई यानी मजदूर दिवस पर बुलाया गया विशेष विधानसभा सत्र वास्तव में जनहित और कर्मचारी हित के लिए है, तो सरकार को इस सत्र के दौरान पंजाब के सी.एल. कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डी.ए.) की लंबित किस्तों तथा समस्त बकाया राशि के भुगतान की स्पष्ट और ठोस घोषणा करनी चाहिए।

जाखड़ ने कहा कि केवल विशेष सत्र बुला लेने भर से सरकार की मंशा पर मुहर नहीं लग जाती। यदि मुख्यमंत्री भगवंत मान सचमुच मजदूरों, कर्मचारियों और आम वर्ग के प्रति संवेदनशील हैं, तो उन्हें राजनीतिक भाषणों से आगे बढ़कर आर्थिक राहत देने वाले निर्णय लेने होंगे। उन्होंने मांग की कि सरकार कम से कम 15,000 करोड़ रुपये की राशि जारी कर 30 जून तक चरणबद्ध भुगतान की गारंटी दे।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि जिन कर्मचारियों का डी.ए. लंबे समय से लंबित पड़ा है, उन्हें बार-बार आश्वासन देकर टाला जा रहा है। अदालतों के निर्देशों के बावजूद यदि सरकार भुगतान को लेकर गंभीर नहीं दिखती तो इससे साफ संदेश जाता है कि विशेष सत्र का वास्तविक उद्देश्य कर्मचारी हित नहीं बल्कि राजनीतिक समीकरण साधना है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस विशेष सत्र के माध्यम से विश्वास प्रस्ताव लाकर आगामी छह महीनों के लिए राजनीतिक सुरक्षा कवच हासिल करना चाहती है। जाखड़ ने कहा कि एक बार विश्वास प्रस्ताव पारित हो जाने के बाद सरकार के खिलाफ छह माह तक अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता, ऐसे में यह पूरा घटनाक्रम जनता का ध्यान मूल मुद्दों से भटकाने की कोशिश प्रतीत होता है।

सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए जाखड़ ने कहा, “मजदूर दिवस की भावना केवल भाषणों और प्रतीकात्मक घोषणाओं से पूरी नहीं होगी। यदि सरकार वास्तव में कर्मचारियों और श्रमिक वर्ग के साथ खड़ी है, तो उसे डी.ए. की किस्तों, बकाया भुगतान और वित्तीय राहत का स्पष्ट रोडमैप विधानसभा में प्रस्तुत करना चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि जिस सरकार ने मनरेगा मजदूरों को 100 दिन के स्थान पर सीमित रोजगार उपलब्ध कराया, उसे मजदूर हितैषी होने का दावा करने से पहले अपने जमीनी कामकाज का लेखा-जोखा जनता के सामने रखना चाहिए। भाजपा जनता, कर्मचारियों और मजदूर संगठनों के साथ मिलकर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाती रहेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मजदूर दिवस पर प्रस्तावित विशेष सत्र को लेकर अब विपक्ष सरकार की नीयत और प्राथमिकताओं पर सीधे सवाल खड़े कर रहा है। ऐसे में 1 मई का विधानसभा सत्र केवल औपचारिक कार्यवाही नहीं, बल्कि राजनीतिक जवाबदेही की कसौटी भी बन सकता है।

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