दोआबा न्यूज़लाइन
राओवाली (पठानकोट बाईपास): पटाखा मार्केट और ग्राम पंचायत राओवाली के बीच चल रहा विवाद आपसी सहमति से सुलझ गया है। पंचायत के सरपंच जसबीर सिंह राणा और पटाखा मार्केट के पदाधिकारियों के बीच बातचीत के बाद सहमति बनी, जिससे मामले का समाधान निकल आया है।
यह मामला ग्राम पंचायत बनाम विकास भंडारी के नाम से चल रहा था। इस मामले में अधिवक्ता जितेंद्र सिंह दुप्पर की भी भूमिका रही।
पटाखा मार्केट के पदाधिकारी विकास भंडारी, धीरज कुमार, रवि महाजन और संजीव बाहरी सहित अन्य सदस्यों ने पंचायत के साथ सहमति जताई। बैठक के दौरान ग्राम पंचायत ने पटाखा मार्केट को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया।
वहीं, पटाखा मार्केट के सदस्यों ने भी पंचायत को भरोसा दिलाया कि मार्केट में सुरक्षा के लिए अधिक से अधिक उचित प्रबंध किए जाएंगे, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। इस मामले में पटाखा मार्केट पर लिया गया स्टे भी वापस ले लिया गया है। इसके बाद अब पटाखा मार्केट गाँव राओवाली, भोगपुर रोड पर पठानकोट चौक के पास ही लगाई जाएगी।
दोनों पक्षों के बीच बनी इस सहमति से विवाद का समाधान हो गया है। पंचायत और पटाखा मार्केट के सदस्यों ने आपसी सहयोग और सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देने पर सहमति जताई है।
पठाखे चलाने के शौकीनों के लिए खुशखबरी, इस जगह लगेगी पटाखा मार्किट
जालंधर: त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले ही जालंधर में अस्थाई पटाका मर्किट के लिए जगह तय हो गई है। मिली जानकारी के अनुसार इस बार अस्थाई पटाखा मार्किट जालंधर के पठानकोट रोड स्थित गांव राओवाली में लगेगी। बताया जा रहा है कि जिला प्रशासन ने गांव राओवाली में 5.5 एकड़ जमीन पर अस्थायी पटाखा मार्केट लगाने के लिए अनुमति दे दी है।
जानकारी के अनुसार अस्थाई पटाखा मार्किट के लिए प्रशासन की ओर से अनुमति के साथ सुरक्षा, ट्रैफिक और दुकानों की व्यवस्था को लेकर कई शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। कहा जा रहा है कि प्रशासन ने जिस जमीन को पटाखा मार्केट के लिए मंजूरी दी है, उसे अजय पार्क के नाम से जाना जाता है। इसमें 150 के करीब दुकानें सजाने की तैयारी चल रही है। बताया जा रहा है कि पटाखा कारोबारियों से जुड़ी एसोसिएशनों ने इस जमीन को 5 साल के लिए पटाखा मार्कीट लगाने के उद्देश्य से लीज पर लिया है। वहीं खबर यह भी है कि इस बार पटाखों के रेट भी पिछली बार से 10 फीसदी ज्यादा होंगे।
बता दें कि इससे पहले ये पटाखा मार्किट बलटर्न पार्क में लगती थीं, जहां शहर और बाहरी इलाकों से लोग आकर पटाखों की खरीदारी करते था।