SGL अस्पताल के डॉक्टरों ने 1 बहुत ही रिस्की डिलीवरी केस में माँ-बच्चे को बचाया

दोआबा न्यूज़लाइन

इंट्राक्रेनियल प्रेशर की एक रेयर बीमारी, एलपी शंट और पहले के दो सिजेरियन के बावजूद हुई सफल डिलीवरी

जालंधर: शहर के एसजीएल अस्पताल के गायनेकोलॉजी डिपार्टमेंट की स्पेशलिस्ट डॉ. नीलू खन्ना और उनकी टीम ने एक बहुत ही कॉम्प्लेक्स और रिस्की केस में एक प्रेग्नेंट महिला का समय पर और सही प्लानिंग और कोऑर्डिनेशन के साथ सफल ऑपरेशन किया, जिसमें महिला और उसका न्यूबोर्न बेबी सुरक्षित रहे। उक्त मरीज़ के पहले दो सिजेरियन ऑपरेशन हो चुके थे और यह उसकी तीसरी प्रेग्नेंसी थी।

डॉ. नीलू खन्ना के मुताबिक 35 हफ़्ते की महिला को पहले से ही बिनाइन इंट्राक्रेनियल हाइपरटेंशन (जिसे स्यूडोट्यूमर सेरेब्री भी कहा जाता है) नाम की कंडीशन थी, साथ ही एमाउरोसिस फुगैक्स (शॉर्ट-टर्म लॉस ऑफ़ विज़न) भी था, जिससे ब्रेन फ्लूइड में प्रेशर बढ़ जाता है। इसके इलाज के लिए उसके शरीर में एक लम्बोपेरिटोनियल (एलपी) शंट डाला गया था। इसके अलावा मरीज़ को आंख के रेटिना में सूजन (मैक्युलर एडिमा) की पुरानी समस्या थी और वह जून 2025 से खून पतला करने वाली दवाएं (एंटीकोएगुलंट्स) और एंटीप्लेटलेट दवाएं ले रही थी।

यह केस और भी मुश्किल हो गया था क्योंकि बच्चा गर्भ में धीरे-धीरे बढ़ रहा था (आइयूजिआर) और एमनियोटिक फ्लूइड की मात्रा कम थी (ओलिगोहाइड्रामनियोस) पिछले ऑपरेशन के निशान की मोटाई सिर्फ़ 1.6 mm थी, जो यूट्रस रप्चर के खतरे को दिखाता है। आंखों की जांच (फंडोस्कोपी) के दौरान, मरीज़ की ऑप्टिक डिस्क के किनारे धुंधले पाए गए और ऑप्टिक कप खत्म पाया गया।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए न्यूरोलॉजिस्ट और एनेस्थिसियोलॉजिस्ट की राय ली गई। सभी डिपार्टमेंट की पूरी प्लानिंग और असरदार पेन मैनेजमेंट के बाद डॉ. नीलू खन्ना की लीडरशिप में मरीज़ का ऑपरेशन जनरल एनेस्थीसिया (पूरी तरह बेहोशी) में किया गया। ऑपरेशन के दौरान महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। इस दौरान मरीज़ की ट्यूबेक्टॉमी भी की गई।

डॉ. नीलू खन्ना ने कहा कि इस केस में सबसे बड़ी चुनौती डिलीवरी के बाद शरीर में फ्लूइड प्रेशर में बदलाव था। इससे सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (सीएसएफ) का फ्लो रुक सकता है, जिससे शंट अचानक काम करना बंद कर सकता है या बहुत ज़्यादा फ्लूइड लीक हो सकता है। ऐसे में, कम प्रेशर से तेज़ और असहनीय सिरदर्द हो सकता है, नज़र और कमज़ोर हो सकती है और कुछ मामलों में नज़र पूरी तरह जा सकती है। इसलिए डिलीवरी के बाद का समय बहुत क्रिटिकल माना जाता है और इस दौरान मरीज़ पर लगातार नज़र रखना ज़रूरी था।

अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि यह केस अलग-अलग डिपार्टमेंट्स की मिली-जुली कोशिशों, समय पर लिए गए फैसलों और मॉडर्न सुविधाओं का एक उदाहरण है। ऑपरेशन के बाद माँ और नवजात बच्चा दोनों सुरक्षित हैं। परिवार ने हॉस्पिटल के डॉक्टरों और स्टाफ़ को धन्यवाद दिया।

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