दोआबा न्यूज़लाईन
जालंधर : पंजाब भर में सरकारी कर्मचारी हड़ताल पर चल रहे है, इसी कड़ी में आज हड़ताल का दूसरा दिन है। पंजाब में महंगाई भत्ते (DA) के बकाए और पुरानी पेंशन योजना (OPS) सहित कई मांगों को लेकर सरकारी कर्मचारी धरना दे रहे है।
गौरतलब है कि सरकार ने अब बिना छुट्टी लिए धरना दे रहे कर्मचारियों को लेकर एक्शन दिखाया है, उन्हें एक लेटर जारी किया है। जिसमें लिखा है, सभी डीसी और विभागों के अध्यक्ष से गैरहाजिर कर्मचारियों की लिस्ट मांगी है। साफतौर पर सरकार ने आदेश जारी किया है कि बतौर नाम के साथ लिस्ट विभाग में पहुंच जानी चाहिए।
सरकार के इस एक्शन के बाद सरकार और कर्मचारियों के बीच तनाव की स्तिथि बन गई है। पहले भी सरकार द्वारा कर्मचरियों को ”कारण बताओ” नोटिस जारी किया था।
जानकारी देते हुए डीसी दफ्तर जालंधर की कर्मचारी यूनियन नेता तेजिंदर नंगल ने पंजाब सरकार पर वादाखिलाफी और तानाशाही के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने कोई गैर-हाजिरी नहीं लगाई है, बल्कि अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत सामूहिक अवकाश लेकर विरोध दर्ज कराया है। सरकार ऐसे नोटिस भेज कर हमें डरा नहीं सकती है। सांझी तालमेल कमेटी की अहम बैठक 24 अक्टूबर (शनिवार) को बुलाई गई है, जिसमें अगले बड़े आंदोलन का ऐलान किया जाएगा। यह जंग जारी रहेगी।
जालंधर में लंबित मांग को लेकर हड़ताल पर कर्मचारी, 2 दिन रहेंगे सामूहिक छुट्टी पर
जालंधर : सरकारी कर्मचारियों की लंबित मांगो को लेकर एक बार फिर से एक्शन लिया जा रहा है, इसी कड़ी में साझी तालमेल कमेटी (साझी एक्शन कमेटी) दो दिवसीय महा हड़ताल शुरू कर दी है। पंजाब के सभी विभागों के कर्मचारी, शिक्षक और पेंशनर अपनी लंबे समय से लंबित अधिकारों की मांगों को लेकर आज, 21 और कल, 22 अक्टूबर को 2 दिन की सामूहिक छुट्टी पर रहेंगे।
इस संबंध में, जॉइंट एक्शन कमेटी के बैनर तले PUDA ग्राउंड में एक बड़ी जिला-स्तरीय बड़ी रैली की गई। इस रैली में सभी जिलों के सैकड़ों कर्मचारियों और पेंशनरों ने भाग लिया।
जानकारी देते हुए तेजिंदर सिंह नंगल ने भगवंत मान के नेतृत्व में काम कर रही पंजाब सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि पंजाब सरकार ने कर्मचारियों की एक भी मांग पूरी नहीं की है। नोटिफिकेशन जारी होने के बावजूद पंजाब में पुरानी पेंशन स्कीम लागू नहीं की जा रही है। DA के संबंध में माननीय पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा कर्मचारियों के पक्ष में दिया गया फैसला लागू नहीं किया जा रहा है। पेंशनरों की पेंशन वेतन आयोग द्वारा अनुशंसित 2.59 के गुणांक से तय करने की मांग की गई। सभी कच्चे, आउटसोर्स, ठेका कर्मचारियों को नियमित करने की मांग की गई। केंद्रीय पैटर्न पर डीए की लंबित किश्तें और बकाया तुरंत जारी करने की मांग की गई।
कर्मचारियों के ट्रांसफर को लेकर ट्रांसपेरेंट पॉलिसी लागू की जाए। नेताओं ने कहा कि सरकार कर्मचारियों की मांगों को लगातार नज़रअंदाज़ कर रही है, जिससे कर्मचारियों में भारी गुस्सा है। अगर सरकार इस रैली के बाद भी बातचीत का रास्ता नहीं अपनाती है तो 22 अक्टूबर के बाद जॉइंट एक्शन कमेटी संघर्ष को ओर तेज़ करेगी। उन्होंने सभी कर्मचारियों, टीचरों और पेंशनरों से अपील की कि वे अपने हकों की रक्षा के लिए कड़े संघर्ष के लिए तैयार रहें।