भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) के प्रशिक्षु अधिकारियों ने की राष्ट्रपति मुर्मु से मुलाकात

दोआबा न्यूज़लाइन

नई दिल्ली: नई दिल्ली के राष्टपति भवन में आज 10 मार्च को भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) के 79वें बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने राष्ट्रपति राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। राष्ट्रपति ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्यक्ष कर राष्ट्रीय विकास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे राजस्व का स्थिर स्रोत प्रदान करके सरकारों को आधारभूत ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और समाज कल्याण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश करने में सक्षम बनाते हैं। निष्पक्ष और पारदर्शी कर प्रणाली समानता को बढ़ावा देती है और समावेशी तथा सतत विकास की नींव को मजबूत करती है।

राष्ट्रपति ने इस बात पर बल दिया कि राजस्व सेवा का दायित्व केवल कर संग्रह तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि जटिल वित्तीय लेन-देन का विश्लेषण करने, सीमा पार अवैध वित्तीय प्रवाह का पता लगाने और जटिल कॉर्पोरेट संरचनाओं को सुलझाने की आईआरएस अधिकारियों की क्षमता उन्हें विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में राष्ट्र की प्रगति में अपरिहार्य भागीदार बनाती है। उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे न्यायसंगत, कुशल और व्यावसायिक प्रक्रियाओं की गहन समझ पर आधारित निर्णय लें।

राष्ट्रपति ने कहा कि आईआरएस अधिकारी होने के नाते युवा अधिकारियों को अपने आचरण और निर्णय लेने में विवेक का प्रयोग करना चाहिए। एक विवेकशील अधिकारी प्रवर्तन और सुविधा प्रदान करने, अधिकार और विनम्रता तथा तकनीकी क्षमता और मानवीय संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाए रखता है। उन्होंने उन्हें विनम्रता, संयम और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के साथ अपने अधिकार का प्रयोग करने की सलाह दी।

भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) के प्रशिक्षु अधिकारी जिनमें रॉयल भूटान सेवा के दो प्रशिक्षु अधिकारी भी शामिल हैं, नागपुर स्थित राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी (एनएडीटी) में प्रवेश के बाद प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

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