पेट दर्द को गैस समझकर न करें इग्नोर, यह दें सकता है कई डिजीज को न्योता, जानें इसके संकेत

दोआबा न्यूज़लाईन

जालंधर : पेट में दर्द होने पर अक्सर लोग इसे गैस, एसिडिटी या अपच मानकर घरेलू नुस्खे आजमाने लगते हैं। कई बार यह सामान्य दर्द वक्त के साथ ठीक हो जाता है, लेकिन इसे बार-बार नजरअंदाज करना गंभीर बीमारी को न्योता देना हो सकता है। पेट दर्द के पीछे पित्ताशय (गॉलब्लैडर) की पथरी, हर्निया या अपेंडिक्स जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए इसे कभी भी इग्नोर नहीं करना चाहिए।

जोहल मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जालंधर के डायरेक्टर एवं जनरल व लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. बीएस जोहल ने दोआबा न्यूज़लाईन की टीम ने विशेष बातचीत की। उन्होंने कहा कि पेट के अचानक या लगातार होने वाले दर्द की सही समय पर चिकित्सकीय जांच कराना बेहद जरूरी है। आधुनिक समय में ऐसी समस्याओं के इलाज के लिए दूरबीन विधि (लैप्रोस्कोपिक सर्जरी) का व्यापक इस्तेमाल हो रहा है।

क्या है दूरबीन विधि (लैप्रोस्कोपिक तकनीक)?
लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में पेट पर बड़ा चीरा लगाने की बजाय कुछ बेहद छोटे चीरे लगाए जाते हैं। कैमरे और आधुनिक उपकरणों की मदद से ऑपरेशन पूरा किया जाता है।
फायदे: इस तकनीक से मरीज को कम दर्द होता है, शरीर पर छोटे निशान पड़ते हैं, संक्रमण का खतरा घटता है और अस्पताल में कम समय रुकना पड़ता है।
ध्यान दें: हर मरीज दूरबीन विधि के लिए उपयुक्त नहीं होता। बीमारी की जटिलता और रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर ओपन सर्जरी या लैप्रोस्कोपी का फैसला लेते हैं।

इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज
यदि पेट दर्द के साथ नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
पेट में अचानक तेज दर्द होना या दर्द का लगातार बढ़ना।
दर्द के साथ तेज बुखार आना या ठंड लगना।
बार-बार उल्टी या मिचली होना।
पेट में असामान्य सूजन या कड़ापन महसूस होना।
चक्कर आना या बेहोशी जैसी स्थिति बनना।

बचाव और रिकवरी के जरूरी टिप्स

  1. बिना डॉक्टरी सलाह के दवा न लें: दर्द होने पर खुद से पेनकिलर या एंटासिड खाकर इलाज टालने की गलती न करें।
  2. सही समय पर जांच: लक्षण दिखते ही अल्ट्रासाउंड व अन्य जरूरी टेस्ट करवाएं ताकि समय रहते सही बीमारी का पता चल सके।
  3. सर्जरी के बाद खानपान व दवाओं पर ध्यान: ऑपरेशन के बाद डॉक्टर द्वारा बताई गई डाइट फॉलो करें और दवाओं का समय पर सेवन करें।
  4. घाव की सही देखभाल: दूरबीन सर्जरी के छोटे निशानों पर सफाई रखें। यदि घाव से पानी/पस आए या दर्द बढ़े तो तुरंत सर्जन को दिखाएं।
  5. पर्याप्त आराम: जल्दबाजी में भारी काम करने के बजाय शरीर को पूरी तरह रिकवर होने का समय दें।

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