जालंधर के पनेशिया अस्पताल में पंजाब की पहली डबल चेंबर लीडलेस पेसमेकर तकनीक से 70 वर्षीय मरीज को मिली नई जिंदगी

दोआबा न्यूज़लाइन

जालंधर: महानगर के पनेशिया अस्पताल ने हृदय रोग उपचार के क्षेत्र में एक बड़ी चिकित्सा उपलब्धि दर्ज की है। अस्पताल के हृदय रोग विभाग के डॉ. अमित जैन ने एक प्रेस वार्ता के जरिए इस बड़ी उपलब्धि के बारे में बताया। डॉ. अमित जैन ने बताया कि जालंधर के पनेशिया अस्पताल में एक मरीज को पंजाब का पहला डबल चेंबर बिना तारों के पेसमेकर सफलतापूर्वक लगाया गया, जिससे जरिए एक 70 वर्षीय मरीज को नई जिंदगी मिली। डॉ जैन का कहना है कि उक्त मरीज लंबे समय से बार-बार चक्कर आने और बेहोशी की समस्या से परेशान था। जिसके चलते मरीज के परिजनों ने उसे वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अमित जैन को दिखाया। जिसके बाद मरीज की विस्तृत जांच में पता चला कि मरीज के हृदय की धड़कन अत्यंत अनियमित हो रही थी और उसे तत्काल पेसमेकर की जरुरत थी।

आगे जानकारी देते हुए डॉ. अमित जैन ने बताया कि परिजनों की सहमति के बाद मरीज को डबल चेंबर लीडलेस पेसमेकर लगाने का निर्णय लिया गया। यह एक अत्याधुनिक तकनीक है, जिसमें मरीज की जांघ की नस (फेमोरल वेन) से एक कैथेटर शरीर में डाला गया। हृदय के दाएं हिस्से तक पहुंचकर दो छोटे कैप्सूल के आकार के पेसमेकर लगाए गए। वहीं हृदय के ऊपरी और निचले दोनों चेंबर को नियंत्रित किया गया। इस टेक्निक के जरिए मरीज के शरीर में किसी प्रकार का कोई चीरा या बाहर से डिवाइस फिट नहीं किया जाता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह मिनिमल इनवेसिव थी।

कैसे अलग है यह तकनीक ?

पारंपरिक पेसमेकर तकनीक नई पेसमेकर तकनीक
छाती में चीरा लगाया जाता है। कोई चीरा नहीं।
कॉलर बोन के नीचे पॉकेट बनाया जाता है। कोई बाहरी पॉकेट नहीं।
लीड्स (तार) हृदय तक पहुंचाई जाती हैं। कोई तारें नहीं।
संक्रमण का जोखिम लगभग शून्य।
लीड हिलने का कोई खतरा नहीं।
फेफड़ों में हवा भरने जैसी जटिलता का जोखिम नहीं।

डॉ. जैन ने आगे बताया कि इस नई पेसमेकर टेक्निक के जरिए ट्रीटमेंट के बाद मरीज 8-10 घंटे बाद चलने लग गया। १ दिन में पूरी तरह आराम मिला। ट्रीटमेंट के बाद बेहोशी और चक्कर आने की समस्या समाप्त हो गई। इसके बाद मरीज की बाजुओं की गतिविधियों पर कोई असर नहीं पड़ा। यहाँ तक की ट्रीटमेंट के 2-3 दिनों में मरीज ने सामान्य जीवन जीना शुरू कर दिया। नई टेक्निक के जरिए टीटमेंट के बाद ड्राइविंग, स्विमिंग, ट्रैवलिंग और अन्य रोजमर्रा के कार्य आसानी से संभव हैं।

नई पेसमेकर तकनीक से किस तरह के मरीजों को मिलेगा फायदा:-
*जिन्हें बार-बार बेहोशी आती है।
*गंभीर ब्रैडीकार्डिया (धीमी हार्ट रेट) वाले मरीज।
*बुजुर्ग जिनमें सर्जरी का जोखिम अधिक है।
*संक्रमण का खतरा झेल रहे मरीज।
*जो जल्दी रिकवरी चाहते हैं।

इस सफल प्रक्रिया को डॉ. अमित जैन, डॉ. कुष तथा संपूर्ण कैथ लैब टीम द्वारा सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। डॉ. अमित जैन ने बताया कि पनेशिया हॉस्पिटल हमेशा आधुनिक तकनीक से इलाज में अग्रणी रहा है और यह उपलब्धि चिकित्सा क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर है। उल्लेखनीय है कि डॉ. अमित जैन ही पंजाब के पहले हृदय रोग विशेषज्ञ हैं जिन्होंने राज्य में पहला सिंगल चेंबर लीडलेस पेसमेकर सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया था। अब उनके नेतृत्व में पंजाब का पहला डबल चेंबर लीडलेस पेसमेकर भी सफलतापूर्वक लगाया गया है।

डॉ. अमित जैन ने बताया कि पंजाब में पहली बार किया गया यह डबल चेंबर लीडलेस पेसमेकर न सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि मरीजों के लिए सुरक्षित, तेज और कम-जोखिम वाला उपचार विकल्प भी साबित हो रहा है। इससे भविष्य में हजारों मरीजों को बिना बड़ी सर्जरी के जीवनदान मिल सकेगा।

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