Home जालंधर Apeejay Institute of Management & Engineering Technical Campus में एआई आधारित उत्पाद निर्माण पर कार्यशाला आयोजित

Apeejay Institute of Management & Engineering Technical Campus में एआई आधारित उत्पाद निर्माण पर कार्यशाला आयोजित

by Doaba News Line

जालंधर: Apeejay Institute of Management & Engineering Technical Campus (AIMETC) के इंजीनियरिंग क्लब द्वारा “वास्तविक जीवन की समस्याओं का समाधान करने वाले एआई (AI) उत्पादों के निर्माण” विषय पर एक प्रभावशाली कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यावहारिक उपयोग और उद्योग से जुड़ी नवीन तकनीकों से अवगत कराना था।

कार्यशाला में विनीत गुप्ता, एआई एवं डेटा साइंस हेड और निदेशक, AlgoSchool AI तथा सनी औलख, एआई मार्केटिंग हेड और निदेशक, AlgoSchool AI ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया। सत्र के दौरान वक्ताओं ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भर्ती प्रक्रिया को अधिक सटीक और प्रभावी बना रही है। उन्होंने अपने एआई-आधारित समाधान “Custom Resume Parse API” की जानकारी दी, जो एचआर फर्मों और संगठनों के लिए रेज़्यूमे स्क्रीनिंग, शॉर्टलिस्टिंग तथा प्रारंभिक इंटरव्यू को स्वचालित करता है। एआई वॉइस एजेंट उम्मीदवारों से संवाद कर उनके उत्तरों और संप्रेषण क्षमता का विश्लेषण कर प्रदर्शन स्कोर तैयार करते हैं।

इसके अतिरिक्त, एआई वॉइस सॉल्यूशंस के विकास में प्रयुक्त प्लेटफॉर्म्स, जैसे Vapi, का परिचय भी कराया गया। AI Receptionist समाधान के माध्यम से कार्य समय के बाद कॉल और अपॉइंटमेंट प्रबंधन की जानकारी दी गई। Proctoring 2.0 नामक एआई-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम द्वारा इंटरव्यू के दौरान पारदर्शिता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया भी समझाई गई।


 

कार्यक्रम में LTIS Edge म्यूचुअल फंड मॉनिटरिंग डैशबोर्ड तथा FMI Report Translator जैसे उन्नत एआई टूल्स का प्रदर्शन भी किया गया, जो रिपोर्ट इमेज का विश्लेषण कर विभिन्न भाषाओं में सटीक अनुवाद प्रदान करता है। कार्यशाला का समापन प्रश्न–उत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें विद्यार्थियों ने एआई तकनीकों और मॉडलों से संबंधित जिज्ञासाएँ प्रस्तुत कीं। अंत में संस्थान की ओर से संसाधन व्यक्तियों को स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। निदेशक डॉ. राजेश बग्गा ने कहा कि इस प्रकार की पहलें शैक्षणिक अध्ययन और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच की दूरी को कम करने में सहायक सिद्ध होती हैं तथा विद्यार्थियों को उभरती तकनीकों के प्रति जागरूक और नवाचार के लिए प्रेरित करती हैं।

 

 

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