लोहड़ी पर्व की पंजाब में क्या विशेषता है

पंजाब : लोहड़ी पंजाब का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। पंजाबी इस त्योहार का साल भर इंतजार करते है। पंजाब में अब धियों की लोहड़ी भी मनाई जाती है। इस त्योहार ने लिंग के भेद भाव को भी समापत कर दिया है। पंजाब के हरेक गावों में अब धियों की लोहड़ी मना कर पंजाब के लोग अपनी बदली हुई सोच का परिचय देते हैं। दुल्ला भट्टी का प्रसंग पंजाब के वीर नायकों की परंपरा को इस दिन पुनर्जीवित करता है। दुल्ला पंजाब का वीर नायक था।

पंजाब की अनेक रस्में लोहड़ी के त्योहार से जुड़ी हैं। लोहड़ी एक ऊर्जा का संचार करने वाला त्योहार है। जो भारतीय समाज एवं परिवार को शक्ति भी देता है। उत्तर भारत में लोहड़ी का त्योहार बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। बच्चों द्वारा “सूंदर मुंदरिये होये,दुल्ला भट्टी वाला होये ,” गीत गाकर लोगों के घर -घर जाकर मूंगफली आदि मांगी जाती है।

बच्चे के जन्म के समय पहले वर्ष में उसकी आगमन को लोहड़ी की पवित्रता के साथ जोड़ कर अनेक शुभ कार्य किए जाते है। इन कार्यों की साक्षी होती है अग्नि। अग्नि धरती का शृंगार है। अग्नि के बिना शक्ति और भक्ति के संकल्पों की सिद्धि नहीं होती। सबसे बड़ा उदाहरण तो पंजाबियों के पास है ऋग्वेद के अग्नि सूत्र। पंजाब की पावन धरा पर कभी ऋषियों ने अग्नि पूजा का विशाल सिद्धांत रखा था। पर्यावरण के प्रति भी पंजाब का यह संदेश आज विश्व को दिशा देता है। लोहड़ी इसी का अटूट हिस्सा है।

पंजाब में अग्नि का बड़ा महत्व है ,पुरातन समय से ही पंजाब में अग्नि को संभाल कर रखा जाता था। पंजाबी घरों में कभी अग्नि को बुझाया नहीं जाता था। लोहड़ी के दिन इसी अग्नि के पुन: पावन रूप की पूजा होती थी। वैसे भी लोहड़ी सामाजिक संबंधों का पर्व है। परिवारों में खुशहाली महसूस करने की ऐसी संवेदना है जिसका सकारात्मक प्रभाव वर्ष भर रहता है। लोहड़ी में ऋतुबदलती है। जनमानस में नई ऊर्जा का संचार होता है।

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